पवार परिवार के फैसले पर कांग्रेस की नजर

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अजित पवार के निधन के बाद पवार परिवार क्या फैसला करता है इस पर कांग्रेस की नजर है। हालांकि कांग्रेस के एक बड़े नेता ने कहा कि उस फैसले पर कांग्रेस यै किसी दूसरी विपक्षी पार्टी का कोई जोर नहीं है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी है जरूर लेकिन उसके नेताओं का आपस में कोई संवाद नहीं है। सब अपने फैसले खुद करते हैं। विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद यह बदलाव आया लेकिन स्थानीय निकाय चुनाव ने इस बिखराव को और बढ़ा दिया है। कांग्रेस नेताओं को पता है कि शरद पवार अब अपने परिवार की राजनीति को भाजपा के साथ लड़ाई के रास्ते पर नहीं ले जा सकते हैं। यह भी सवाल उठ रहा है कि शरद पवार अब भी फैसले को क्या पहले की तरह प्रभावित करने की स्थिति में हैं?

हालांकि कांग्रेस के नेता यह भी कह रहे हैं कि अभी जो भी फैसला होगा वह तात्कालिक होगा। फैसले का मतलब अजित पवार की एनसीपी के सरकार में शामिल होने से नहीं है। वह तो सबको पता है कि पार्टी सरकार के साथ ही रहेगी। सुनेत्रा पवार ने अपने पति की जगह संभाल ली है। बाकी मंत्री भी पहले की तरह बने रहेंगे। फैसले का मतलब है कि दोनों पार्टियों के विलय का और उसके बाद शरद पवार खेमे के भी एनडीए का समर्थन करने का। पिछले कई महीनों से इसकी बातचीत चल रही है। शरद पवार एक तरह से इस बात पर सहमत हों गए हैं कि पार्टियां एक हो जाएं और एनडीए में ही रहें। जानकार सूत्रों का कहना है कि विलय की सारी औपचारिक बातें अजित पवार ने कर ली थीं। फरवरी में इसकी घोषणा होने वाली थी। लेकिन अब यह घोषणा टल सकती है क्योंकि सुनेत्रा पवार स्वतंत्र राजनीति करने के पक्ष में हैं।

सुनेत्रा पवार की राजनीति से कांग्रेस को कुछ ढाढस बंधा होगा। अन्यथा कांग्रेस को इस बात की चिंता थी कि अगर विलय होता है और पवार परिवार की एकजुट पार्टी अगर एनडीए का साथ देती है तो विपक्षी गठबंधन और कमजोर होगा। न सिर्फ महाराष्ट्र में, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी विपक्ष कमजोर होगा। ध्यान रहे शरद पवार की पार्टी के आठ लोकसभा सांसद हैं। राज्य में उनके 10 विधायकों का कोई खास मतलब नहीं है। हालांकि फिर भी एकजुट एनसीपी के 51 विधायक होंगे तो भाजपा पर दबाव रहेगा। लेकिन केंद्र में शरद पवार के आठ और अजित पवार के एक लोकसभा सांसद का समर्थन सरकार को मिल जाए तो नरेंद्र मोदी की सरकार की चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार की पार्टी पर निर्भरता कम होगी। हालांकि कांग्रेस के एक नेता ने संसद के मौजूदा सत्र में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में कहा कि पार्टी पहसे से ही इसकी तैयारी कर रही थी कि शरद पवार की एनसीपी एनडीए में जा सकती है। ऑपरेशन सिंदूर में सुप्रिया सुले भारत सरकार के एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए विदेश गई थीं। वहां उन्होंने विपक्षी गठबंधन की लाइन से हट कर सरकार का बचाव किया और वहां से लौटने के बाद भी वे अक्सर सरकार के समर्थन में ही दिखीं। तभी कांग्रेस महाराष्ट्र की राजनीति के अपने दांवपेंच की तैयारी कर रही थी। लेकिन अगर परिवार में नेतृत्व को लेकर टकराव होता है और विलय नहीं होता है तो फिर संभव है कि शरद पवार विपक्षी गठबंधन के ही साथ रहें।


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