कांग्रेस संभावना देख रही है

Categorized as राजनीति

महाराष्ट्र में कांग्रेस पार्टी संभावना देख रही है। उनको लग रहा है कि अजित पवार के निधन के बाद राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव आ सकता है। संसद के बजट सत्र के पहले दिन कांग्रेस के नेता इस बात की चर्चा कर रहे थे कि अजित पवार के निधन के बाद उनकी पार्टी का विलय शरद पवार की पार्टी के साथ हो जाएगा और शरद पवार पार्टी को एनडीए से बाहर करेंगे। हालांकि कम से कम अजित पवार की पार्टी सरकार से बाहर नहीं होने जा रही है। पहले की तरह ही समीकरण बना रहेगा। अजित पवार की पार्टी के आठ नेता अभी सरकार में मंत्री हैं, जिनमें से सात कैबिनेट मंत्री हैं। वे न तो अभी सरकार से बाहर हो रहे हैं और न पार्टी सरकार से समर्थन वापस लेवे जा रही है।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि तुरंत यह काम नहीं होगा। लेकिन अब महाराष्ट्र में नया समीकऱण बनेगा। उनके ऐसा मानने का आधार यह है कि अजित पवार के नहीं रहने से मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस को झटका लगा है। अब एकनाथ शिंदे सरकार के ऊपर दबाव बढाएंगे। कांग्रेस के एक जानकार नेता का कहना है कि अजित पवार एक्स फैक्टर थे, जिनसे भाजपा को ताकत मिली हुई थी और वह एकनाथ शिंदे के दबाव का जवाब दे पाती थी। अब फिर से भाजपा को अलग थलग करने की राजनीति शुरू हो सकती है। मुंबई के मेयर के चुनाव में ही इसकी परीक्षा हो जाएगी। अगर दोनों एनसीपी का विलय हुआ तो उनके विधायकों की संख्या 51 और लोकसभा सांसदों की संख्या आठ होगी। इससे भाजपा भी दबाव में आएगी। कांग्रेस के नेता यहां तक उम्मीद कर रहे हैं कि भाजपा को छोड़ कर सभी पार्टियां एक मंच पर आ सकती हैं। गौरतलब है कि भाजपा के 132 विधायक हैं, जो बहुमत से 13 कम है। हालांकि यह बहुत दूर की कौड़ी है लेकिन अगर पूरी एनसीपी की कमान शरद पवार के हाथ में आती है तो राजनीति निश्चित रूप से दिलचस्प होगी।


Previous News Next News

More News

केजरीवाल और स्टालिन एक साथ

April 22, 2026

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव की जो भी रिपोर्ट आ रही है उसमें कहा जा रहा है कि तमिलनाडु और उससे सटे केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में भाजपा विरोधी गठबंधन में कमजोर कड़ी कांग्रेस है। चुनाव प्रचार समाप्त होने से ठीक पहले सर्वे करने वाली एजेंसियों ने जो डाटा इकट्ठा किया है उसके मुताबिक तमिलनाडु में डीएमके…

बंगाल में आखिर लाखों लोग छूट गए

April 22, 2026

पश्चिम बंगाल में सब कुछ अभूतपूर्व हो रहा है। पहली बार ऐसा हुआ कि मतदान के लिए प्रचार समाप्त होने और साइलेंट पीरियड शुरू होने तक मतदाता सूची में नाम जोड़े गए। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि तार्किक विसंगति के आधार पर जिन 27 लाख लोगों के नाम कटे हैं उनके नाम जैसे…

झारखंड की तरह बंगाल भी डुबाएंगे हिमंता

April 22, 2026

असम के चुनाव के बाद वहां के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पश्चिम बंगाल पहुंच गए हैं। वहां उन्होंने चुनाव प्रचार शुरू कर दिया है। वे स्टार प्रचारकों की सूची में हैं। झारखंड में तो वे सह प्रभारी थे। जिस तरह से उन्होंने झारखंड में घुसपैठ के बहाने मुस्लिम विरोध दिखाया उससे भाजपा को बहुत नुकसान…

वेदांता, टाटा, लेंसकार्ट सबकी एक दशा

April 22, 2026

भारत में हमेशा राजनीतिक लड़ाइयों की चर्चा होती है। पार्टियों के बीच कैसा मुकाबला चल रहा है और कहां चुनावी लड़ाई में कौन आगे है इससे सब परिचित होते हैं। लेकिन कॉरपोरेट वॉर की चर्चा होती ही नहीं है। होती भी है तो बड़े सतही स्तर पर होती है। मीडिया में भी इसकी चर्चा बहुत…

एक चेहरा, अंतहीन प्रचार अंतहीन

April 22, 2026

अभी मोदी ही सबसे बड़ी कहानी हैं। लेकिन कहानियां बदलती हैं। और इस कहानी के पाठक अब देख रहे हैं कि यह आगे बढ़ना बंद कर चुकी है। भारत का अगला अध्याय अतीत को दोहराकर नहीं बनेगा। वह तब बनेगा जब कोई दोनों भ्रमों को तोड़ने का साहस करेगा—पहचान की राजनीति और असफल आर्थिक ढांचे…

logo