यह कंफ्यूजन इस बात से पैदा हुआ है कि दिल्ली में राज्य सरकार ने महिला सम्मान निधि के नाम पर महिलाओं को ढाई हजार रुपए देने की जो लक्ष्मी योजना शुरू की है उसमें एक प्रावधान किया गया है कि जिन महिलाओं के तीन या उससे ज्यादा बच्चे हैं उनको इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। सरकार ने लाभार्थी महिलाओं की संख्या कम से कम रखने के लिए ऐसे कई प्रावधान किए हैं। ऐसे ही प्रावधानों की वजह से दिल्ली में लाभार्थियों की संख्या सिर्फ 17 लाख बताई जा रही है। उसमें भी दिल्ली सरकार डोर टू डोर जाकर महिलाओं का वेरिफिकेशन करेगी।
बहरहाल, तीन या तीन से ज्यादा बच्चों वाली महिलाओं को स्कीम से बाहर करने के प्रावधान पर आम आदमी पार्टी और दूसरी भाजपा विरोधी पार्टियां चुटकी ले रही हैं। उनका कहना है कि भाजपा और संघ परिवार मिल कर एक बार बता दे कि हिंदुओं को क्या करना है। एक तरफ संघ प्रमुख मोहन भागवत और अन्य लोग अपील कर रहे हैं कि हिंदुओं को कम से कम तीन बच्चे पैदा करने चाहिए औऱ दूसरी ओर भाजपा की सरकार तीन बच्चों वाले परिवार की महिलाओं को लक्ष्मी योजना से बाहर कर रही है। यह देखना दिलचस्प होगा कि दिल्ली की इस योजना के बाद भी क्या संघ के लोग हिंदुओं से तीन बच्चे पैदा करने की अपील करेंगे?
