बंगाल में केंद्रीय बलों की तैनाती

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पश्चिम बंगाल को लेकर भारतीय जनता पार्टी के नेता और अनेक स्वतंत्र जानकार यह कहते हैं कि वहां भाजपा की जीत की संभावना एक ही स्थिति में है, जब राज्य में चुनाव टल जाए और राष्ट्रपति शासन लगे या अभी किसी तरह से राष्ट्रपति शासन लगा कर ही चुनाव कराया जाए। सत्ता में रहते ममता बनर्जी को हराना नामुमकिन माना जा रहा है। हालांकि कई लोग यह भी कहते हैं कि अगर केंद्रीय बलों की तैनाती समय से पहले हो जाए और ज्यादा संख्या में केंद्रीय बल तैनात किए जाएं तब भी मौका बनेगा। खुद तृणमूल के नेता ऐसे मौके उपलब्ध करा रहे हैं। हाल में मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में हिंसा भड़क गई और उसके बाद हाई कोर्ट की एक खंडपीठ ने वहां तत्काल केंद्रीय बलों की तैनाती का आदेश दिया।

चुनाव आयोग और ईडी के अधिकारियों के दौरे लगातार जारी है। पिछले दिनों ईडी प्रमुख राहुल नवीन भी बंगाल गए थे। ईसी और ईडी दोनों के अधिकारी खतरा बता रहे हैं क्योंकि तृणमूल कांग्रेस के नेता उनके खिलाफ अनापशनाप बयान दे रहे हैं। लाठी उठाने और मारने की बातें कर रहे हैं। अगर इस आधार पर केंद्रीय बलों की तैनाती ज्यादा कर दी गई तो तृणमूल कांग्रेस को मुश्किल होगी। हालांकि राज्य में चुनाव सर्वेक्षण का काम कर रही एक एजेंसी के प्रमुख ने पिछले दिनों अनौपचारिक बातचीत में कहा कि केंद्रीय बलों की तैनाती से नहीं होगा। केंद्रीय बल के लोग बूथ के अंदर नहीं जा सकते हैं। बूथ के अंदर राज्य सरकार के कर्मचारी होते हैं और पार्टियों के पोलिंग एजेंट होते हैं। उनका कहना है कि डरा धमका कर या पैसे देकर तृणमूल कांग्रेस भाजपा के भी पोलिंग एजेंट को मिला लेती है और आखिरी घंटे में हर ईवीएम में सौ दो सौ वोट डाल दिए जाते हैं। उसे नहीं रोका गया तो भाजपा कभी नहीं जीतेगी।


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