सीपीएम मुस्लिम वोट का मोह छोड़ रही है

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केरल में 10 साल से राज कर रही कम्युनिस्ट पार्टियों का मोर्चा लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए चुनाव में जा रहा है। लेकिन इस बार ऐसा लग रहा है कि सीपीएम के नेतृत्व वाला मोर्चा अपनी रणनीति में कुछ बुनियादी बदलाव कर रहा है। जैसे इस बार लग रहा है कि सीपीएम ने मुस्लिम वोट का मोह छोड़ दिया है या कम कर दिया है। तभी उसके नेता मुस्लिम जमात के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं, इस्लामोफोबिया दिखा रहे हैं और खुद मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन मुसलमानों के खिलाफ बयान देने वाले नेता वेल्लापली नतेशन को अपने साथ लेकर घूम रहे हैं।

ऐसा लग रहा है कि केरल में सीपीएम ने ईसाई और व्यापक रूप से हिंदू वोट की राजनीति साधने की रणनीति बनाई है। तभी उसके नेता शाजी चेरियन ने मुस्लिम विरोधी बयान दिया। उन्होंने कासरगौड और मल्लापुरम के नगर निकाय चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि वहां या तो मुस्लिम लीग के पार्षद जीते हैं या भाजपा के जीते हैं। एक तरह से उन्होंने भाजपा के साथ साथ मुस्लिम लीग का भी भय दिखाया। हालांकि बाद में वे अपने बयान से पीछे हटे। लेकिन यह भी सीपीएम की रणनीति का ही हिस्सा लग रहा है। इसका कारण यह है कि कांग्रेस और मुस्लिम लीग की वजह से मुस्लिम वोट का रूझान व्यापक रूप से कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ के समर्थन में है। सीपीएम को लग रहा है कि वह वोट उनको नहीं मिलेगा। इसलिए वे नतेशन के जरिए पिछड़ी जाति का वोट साधने में लगे हैं और नायर वोट को कंसोलिडेट कर रहे हैं। इसमें ईसाई वोट जोड़ कर चुनाव जीतने का उनका दांव होगा।


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