दावोस जाकर देसी कंपनियों से करार

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दावोस में चल रही विश्व आर्थिक मंच की बैठक दुनिया के लिए दिलचस्पी का कारण इसलिए रही क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रप एक भारी भरकम टीम के साथ पहुंचे थे और ग्रीनलैंड के मसले पर यूरोप के देशों के साथ उनके संबंधों को वहां परिभाषित होना था। लेकिन भारत में यह सम्मेलन अलग कारणों से मजाक का विषय बना है। सबसे ज्यादा मजाक इस बात को लेकर हो रहा है कि भारत के बड़े बड़े नेता, मुख्यमंत्री और उद्योगपति दावोस पहुंचे हैं और वहां आपस में ही करार कर रहे हैं। न तो सरकारों का करार विदेशी कंपनियों के साथ दिख रहा है और न देसी कंपनियों का करार दुनिया के दूसरे देशों के साथ होता दिख रहा है।

दावोस से जो तस्वीरें आई हैं उनमें दो की बड़ी चर्चा है। एक तस्वीर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस की लोढ़ा समूह के लोगों के साथ करार करने की है तो दूसरी तस्वीर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की टाटा समूह के साथ करार की है। झारखंड सरकार ने टाटा समूह के साथ 11 हजार करोड़ रुपए का एक एमओयू साइन किया है। सोचें, टाटा समूह की सबसे बड़ी इस्पात फैक्टरी झारखंड में है लेकिन झारखंड सरकार दावोस जाकर करार कर रही है। फड़नवीस और लोढ़ा समूह का तो अलग ही मजाक है। ध्यान रहे लोढ़ा समूह के प्रमोटर मंगल प्रभात लोढ़ा भाजपा के नेता हैं और मुंबई में ही रहते हैं, जहां मुख्यमंत्री रहते हैं। तभी एक व्यक्ति ने सोशल मीडिया में मजाक में लिखा कि मुंबई का ट्रैफिक इतना ज्यादा है कि मुख्यमंत्री और लोढा को दावोस जाकर समझौता करना पड़ा।


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