नई दिल्ली। कांग्रेस ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित विसंगतियों और सत्तापक्ष के कई प्रमुख लोगों को नोटिस जारी होने का हवाला देते हुए सोमवार को पूरी प्रक्रिया को ‘दोषपूर्ण’ बताया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि एसआईआर अब ‘भस्मासुर’ बन गया है और सत्तारूढ़ दल के अपने लोगों को ही चपेट में लेने लगा है।
खरगे ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि बिहार से शुरू हुआ एसआईआर अब दिल्ली पहुंच गया है। शायद अब सत्तारूढ़ दल को समझ में आ रहा होगा कि कांग्रेस ने पहले दिन से ही इस प्रक्रिया को ‘दोषपूर्ण’ क्यों बताया था। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर “भाजपा द्वारा वोट चोरी और लोकतंत्र को खत्म करने का हथियार” है और अब यह “भस्मासुर” बन चुका है।
खरगे ने दावा किया कि भाजपा के कई बड़े नेताओं को भी नोटिस जारी किए गए हैं। इनमें भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मौजूदा विदेश मंत्री, दिल्ली के उपराज्यपाल, एक पूर्व केंद्रीय मंत्री और एक पूर्व मुख्यमंत्री शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि इससे पहले ‘भारत रत्न’ से सम्मानित एक वैज्ञानिक और एक पूर्व नौसेना प्रमुख को भी नोटिस जारी किए जा चुके हैं। कांग्रेस अध्यक्ष ने निर्वाचन आयोग की ओर से जारी एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में ‘वीआईपी/चिह्नित मतदाताओं’ के उल्लेख पर भी सवाल उठाया।
उन्होंने पूछा, “क्या अब भारत के सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार में मतदाताओं की कोई विशेष श्रेणी यानी वीआईपी मतदाता की श्रेणी भी शामिल हो गई है?”खरगे ने कहा, “क्या हमारे संविधान ने जो एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य का सिद्धांत दिया था, ये उसकी अवहेलना नहीं है? क्या वीआईपी वोट अब ज्यादा कीमती हो गया है?”
उन्होंने दावा किया कि एसआईआर के पहले तीन चरणों में 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 13.8 करोड़ मतदाता मतदाता सूची से बाहर हुए हैं। उनके मुताबिक यह 94.78 करोड़ मतदाताओं का करीब 14.61 प्रतिशत है। खरगे ने आरोप लगाया, “वीआईपी के लिए प्रेस विज्ञप्ति, करोड़ों आम मतदाताओं के लिए खामोशी।”
