नोएडा में फैक्टरी कर्मचारियों का उग्र प्रदर्शन

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नोएडा। वेतन में बढ़ोतरी और काम की स्थितियों में सुधार के लिए पिछले कई दिनों से चल रहा फैक्टरी कर्मचारियों और मजदूरों का आंदोलन सोमवार को उग्र हो गया। मजदूर और कर्मचारी नौ अप्रैल से ही प्रदर्शन कर रहे थे। लेकिन उनकी मांगों पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। इसके बाद हजारों की संख्या में मजदूर और कर्मचारी नोएडा के अलग अलग हिस्सों में सड़कों पर उतरे। उन्होंने अलग अलग इलाके में सड़कें जाम कीं, 50 से ज्यादा फैक्टरियों में पथराव और तोड़फोड़ की। साथ ही डेढ़ सौ से ज्यादा गाड़ियों में तोड़फोड़ की और करीब 50 से ज्यादा गाड़ियों में आग लगा दी। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की गाड़ियां भी पलट दी।

हालात बिगड़े तो कई थानों की पुलिस भी मौके पर पहुंची। कई जगह पुलिस की ओर से लाठी चलाने, आंसू गैस के गोले छोड़ने और पानी की बौछार से नाराज मजदूरों व कर्मचारियों ने उन पर पथराव किया। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक मांगें नहीं मानी जातीं, वो रुकेंगे नहीं। कई कर्मचारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। खास बात है कि इस प्रदर्शन का कोई चेहरा या लीडर नहीं था। 18 से 30 साल के युवा अपने आप प्रदर्शन कर रहे थे। उनका कहना था कि कई फैक्टरियों में नौ या 10 हजार रुपए वेतन मिलता है। साल में दो से ढाई सौ रुपए की बढ़ोतरी होती है। हफ्ते की छुट्टी नहीं मिलती है और 12 घंटे काम कराया जाता है।

सोमवार के प्रदर्शन के बाद योगी आदित्यनाथ की सरकार ने जांच के लिए उच्चस्तरीय कमेटी बनाई है। मुख्यमंत्री ने कहा है, औद्योगिक अशांति पैदा करने वाले लोगों से सावधान रहें। हमारी सरकार श्रमिकों के साथ में है। बहरहाल, सोमवार को सबसे पहले फेज दो के इलाके में हालात खराब हुए। फेज दो के बाद धीरे धीरे प्रदर्शन नोएडा के करीब 10 औद्योगिक इलाकों और आसपास के जिलों में फैल गया। प्रदर्शनकारियों को काबू में करने के लिए पीएसी और आरएएफ को भी उतारा गया।


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