ट्रंप ने मांगी नाटो की मदद

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नई दिल्ली। ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमले के 17 दिन हो गए हैं और युद्ध समाप्त होने के आसार नहीं दिख रहे हैं। इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो देशों से मदद मांगी है। उन्होंने कहा है कि अगर सहयोगी देश ईरान मामले में मदद नहीं करते तो नाटो का भविष्य खराब हो सकता है। दूसरी ओर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इन खबरों को खारिज किया है कि ईरान ने अमेरिका से युद्धविराम की कोई बात नहीं की है। उन्होंने यह भी कहा है कि उनका देश अभी अमेरिका से बातचीत की कोई वजह नहीं देख रहा है।

बहरहाल, ट्रंप ने ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ को दिए इंटरव्यू में नाटो देशों को लेकर कहा है कि अगर सहयोगी देश होरमुज की खाड़ी को खुला रखने में मदद नहीं करते, तो गठबंधन की स्थिति कमजोर हो सकती है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने यूक्रेन की मदद की, जबकि वह उससे हजारों मील दूर है, अब यह देखना होगा कि सहयोगी देश अमेरिका की मदद करते हैं या नहीं। इस बीच जर्मनी ने स्पष्ट कर दिया कि वह ईरान से जुड़े युद्ध में शामिल नहीं होगा और न ही सैन्य बल के जरिए होरमुज की खाड़ी को खुला रखने के किसी अभियान में हिस्सा लेगा।

उधर ग्रीस ने भी कहा है कि वह होरमुज की खाड़ी में किसी सैन्य कार्रवाई में शामिल नहीं होगा। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने दोहराया है कि कहा कि उनका देश मध्य पूर्व की जंग में शामिल नहीं होगा और उसकी प्राथमिकता क्षेत्र में मौजूद अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। फ्रांस ने पहले ही अपने को अमेरिका और इजराइल के इस सैन्य अभियान से अलग रखे हुए है। स्पेन ने भी इस युद्ध की आलोचना की है। गौरतलब है कि 17 दिन के इस युद्ध में करीब ढाई हजार लोगों की मौत हो गई है।

इस बीच ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ की एक रिपोर्ट में कहा गया कि राष्ट्रपति ट्रंप सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के संपर्क में हैं और वे इस युद्ध का समर्थन कर रहे हैं। हालांकि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी पड़ोसी देशों को मौजूदा जंग पर अपना रुख जल्दी साफ करने को कहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका और इजराइल के हमलों में ईरान में सैकड़ों नागरिक मारे गए हैं। उन्होंने कहा कि कुछ पड़ोसी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों से ईरान पर हमले किए जा रहे हैं। इसलिए उन देशों को रुख साफ करना चाहिए।

उधर इजराइल की सेना ने कहा है कि ईरान के साथ अगले तीन हफ्ते तक लड़ने के लिए उसकी योजना तैयार है। सेना के प्रवक्ता नदाव शोशानी ने सोमवार को कहा है कि सेना ने इससे आगे के समय के लिए भी अलग योजनाएं बना रखी है। इजराइली सेना का कहना है कि इस अभियान का मकसद सीमित है। वह ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल ढांचे, परमाणु ठिकानों और सुरक्षा तंत्र को निशाना बना रहा है।


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