नई दिल्ली। आखिरकार अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमला कर दिया। जिनेवा में गुरुवार की वार्ता विफल होने के बाद से हमले की तैयारी तेज हो गई थी। शनिवार की सुबह इजराइल ने ईरान की राजधानी तेहरान सहित 10 शहरों पर बड़ा हमला किया। देर शाम खबर आई कि इजराइली हमले मे ईरानी रक्षा मंत्री अमीर नासिरजादेह और रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर मोहम्मद पाकपोर की मौत हो गई। इससे पहले ईरानी न्यूज एजेंसियों ने बताया था कि दक्षिणी ईरान के एक स्कूल पर मिसाइल गिरने से 40 छात्राओं की मौत हो गई, जबकि 45 घायल हैं। इस हमले से भारत की तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है और पूरी दुनिया में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है।
बहरहाल, इजराइल ने अमेरिका के साथ मिल कर यह हमला किया। हमले के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक वीडियो जारी कर कहा कि ईरान पर यह हमला अमेरिकी नागरिकों की रक्षा के लिए किया गया है। अमेरिका और इजराइल के हमले के जवाब में ईरान ने इजराइल पर करीब चार सौ मिसाइलें दागीं। इसके अलावा उसने कतर, कुवैत, जॉर्डन, बहरीन, सऊदी अरब व संयुक्त अरब अमीरात में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को भी निशाना बनाया। ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात के सबसे ज्यादा आबादी वाले शहर दुबई पर भी हमला किया।
इजराइल और अमेरिका का यह हमला ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसके बैलेस्टिक मिसाइल कार्यक्रम से ज्यादा सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई के खिलाफ माना जा रहा है। इस हमले में सबसे पहले ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई और राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान को निशाना बनाया गया। उनके ठिकानों पर सात मिसाइल हमले होने की खबर है। हालांकि दोनों नेताओं को पहले ही सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जा चुका था।
इजराइल ने ईरान के खिलाफ अपने इस अभियान का नाम ‘लियोनस् रोर’ यानी शेर की दहाड़ रखा है। गौरतलब है कि इससे पहले ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु हथियारों को लेकर बातचीत चल रही थी। मस्कट और जिनेवा में कई दौर की बातचीत हुई। बातचीत के बीच अमेरिका की तैयारी चल रही थी। उसने अपने दो सबसे बड़े युद्धपोत अरब की खाड़ी में पहुंचा दिए थे और बड़ी संख्या में लड़ाकू विमान भी खाड़ी क्षेत्र में तैनात किए थे।
ट्रंप ने हमले की चेतावनी देते हुए कहा था कि अमेरिकी सेना ईरान की मिसाइलों को तबाह करने और उसके मिसाइल प्रोग्राम को खत्म करने की कोशिश कर रही है। ध्यान रहे बातचीत के दौरान ईरान सिर्फ परमाणु कार्यक्रम पर बात करना चाहता था, जबकि अमेरिका चाहता था कि ईरान अपना बैलेस्टिक मिसाइल प्रोग्राम बंद करे, जिसके लिए वह किसी कीमत पर तैयार नहीं हो रहा था। ईरान का कहना है कि जून 2025 में इजराइल और अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला किया, तब ईरान की मिसाइलों ने ही उसकी रक्षा की। ईरानी अधिकारियों ने बार-बार कहा है कि मिसाइल कार्यक्रम पर कोई बात नहीं होगी।
