प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यौन उत्पीड़न मामले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को बड़ी राहत दी है। हाई कोर्ट फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा ने हालांकि शंकराचार्य की ओर से दायर अग्रिम जमानत पर फैसला नहीं सुनाया। परंतु फैसला सुरक्षित रखते हुए जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा ने कहा कि फैसला आने तक गिरफ्तारी नहीं होगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि शंकराचार्य जांच में सहयोग करें।
हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान शंकराचार्य की ओर से वकील पीएन मिश्रा ने उनका पक्ष रखा, जबकि राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल पेश हुए। शिकायकर्ता आशुतोष महाराज की वकील रीना सिंह ने भी दलीलें रखीं। अब मार्च के तीसरे हफ्ते में केस की सुनवाई होगी। हाईकोर्ट के फैसले के बाद शंकराचार्य ने कहा, ‘शंकराचार्य जैसी संस्था को बदनाम करने की कोशिश की गई’।
फैसले के बाद शंकराचार्य ने कहा, ‘आज जो हालात हैं कि अपने भाई पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं। सारा अमला भ्रष्ट नहीं हो सकता। कहीं तो कोई होगा, जिसके मन में न्याय होगा। इसलिए संघर्ष जारी रहना चाहिए’। उन्होंने कहा, ‘पूरे देश का हिंदू समुदाय आशंकित था। उन्हें लगने लगा था कि हमारे गुरु ने क्या गड़बड़ी की है। मुकदमा झूठा बनाया गया था। बटुक कभी आश्रम में नहीं रहे हैं। शिकायकर्ता आशुतोष महाराज ने कहा, हमें पूर्ण विश्वास है की धर्म की विजय होगी ओर पीड़ित पक्ष को न्याय मिलेगा’।
गौरतलब है कि शंकराचार्य ने बटुकों के यौन उत्पीड़न मामले में 24 फरवरी को अग्रिम जमानत के लिए याचिका लगाई थी। इससे पहले रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी ने 173 (4) के तहत जिला कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। विशेष पोक्सो अदालत के जज विनोद कुमार चौरसिया के आदेश के बाद झूंसी थाने की पुलिस ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।
