ममता ने सुप्रीम कोर्ट में रखीं दलीलें

Categorized as समाचार

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बुधवार को वकील के रूप में नजर आईं। उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के मसले पर सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार का पक्ष रखा। ध्यान रहे ममता बनर्जी वकील रही हैं और 2003 तक वे प्रैक्टिस भी करती थीं। बुधवार को वे वकीलों के साथ मौजूद रहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल चुनाव आयोग के निशाने पर है। ममता ने कहा कि जो काम दो साल में होना था, उसे तीन महीने में करवाया जा रहा है।

सुनवाई के बाद चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने कहा कि असली लोग चुनावी सूची में बने रहने चाहिए। ममता बनर्जी की याचिका पर अदालत ने चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी से नौ फरवरी तक जवाब मांगा। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, ‘सभी नोटिस वापस लेना अव्यावहारिक है। नाम की स्पेलिंग में गड़बड़ी होने पर चुनाव आयोग नोटिस जारी न करे’।

चीफ जस्टिस ने निर्देश देते हुए कहा, ‘चुनाव आयोग अपने अधिकारियों को भी निर्देश दे कि वे संवेदनशील रहें। अगर राज्य सरकार ऐसे लोगों की टीम देती है, जो बांग्ला और स्थानीय बोलियां जानते हों, और वे जांच करके चुनाव आयोग को बताएं कि स्थानीय बोली के कारण गलती है, तो इससे मदद मिलेगी’। उन्होंने कहा, ‘स्थानीय बोली के अनुवाद को एआई की मदद लेने के कारण अगर ऐसा हो रहा है तो हम समाधान निकालेंगे। इस वजह से असली मतदाता को बाहर नहीं किया जाना चाहिए’।

बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में यह पहला मौका था जब किसी राज्य का मौजूदा मुख्यमंत्री कोर्ट में पेश होकर अपनी दलीलें रखीं। मुकदमों में मुख्यमंत्रियों के वकील या सलाहकार ही पेश होते हैं। परंतु ममता बनर्जी ने अपनी याचिका पर खुद अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले दो महीने में ऐसा कुछ करने की कोशिश की जा रही है, जो दो साल में होना था। उन्होंने कहा कि खेतीबाड़ी के मौसम में लोगों को परेशान किया जा रहा है। ममता ने दावा किया कि एक सौ से ज्यादा लोगों की जान चली गई है। उन्होंने लॉजिकल डिस्क्रिपेंसीज का मुद्दा उठाते हुए कहा कि बेटियां शादी के बाद पति के नाम का इस्तेमाल कर रही हैं। इसे भी मिसमैच मान कर नोटिस दिया जा रहा है।


Previous News Next News

More News

सत्रावसान में देरी का एक रिकॉर्ड तो टूटा

September 29, 2026

संसद का मानसून सत्र समाप्त हुए डेढ़ महीने से ज्यादा हो गए। सत्र 13 अगस्त को स्थगित हुआ था। लेकिन अभी तक सत्रावसान नहीं किया गया है। संसद स्थघित हुए 47 दिन हो गए हैं। आमतौर पर अनिश्चितकाल तक के लिए स्थगित होने के एक हफ्ते में सत्रावसान कर दिया जाता है। उसके बाद जब…

सीपीएम का अपना एजेंडा है

September 29, 2026

देश की सबसे बड़ी कम्युनिस्ट पार्टी सीपीएम के महासचिव एमए बेबी ने विपक्षी गठबंधन की बैठक बुलाने की पहल की। इस पहल पर ममता बनर्जी ने सबसे पहले जवाब दिया और उन्होंने बेबी से फोन पर बात की। कांग्रेस ने भी इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और उसके बाद 30 सितंबर की बैठक तय हुई।…

सपा-कांग्रेस की मुस्लिम वोट की खींचतान

September 29, 2026

वैसे उत्तर प्रदेश के मुसलमानो के मन में कोई भ्रम नहीं है। वे अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी के साथ हैं क्योंकि उनको लग रहा है कि सपा ही इस बार भाजपा से लड़ने वाली मुख्य ताकत है। पिछले लोकसभा चुनाव मे उन्होंने देखा कि भाजपा के समर्थक मतदाताओं में भी अगर भाजपा से नाराजगी…

यूपीएससी के सवाल क्या एआई बना रहा है?

September 29, 2026

यह बहुत परेशान करने वाला सवाल है क्योंकि संघ लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी एकमात्र ऐसी संस्था है, जिस पर प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले अभ्यर्थी आज भी आंख मूंद कर भरोसा करते हैं। इसका भरोसा इतना गहरा है कि सुप्रीम कोर्ट ने दो बार अपनी सुनवाई में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए और…

साहब अच्छे एक्टर नहीं!

September 29, 2026

कारण जो हो, साहब का विदेशियों के प्रति प्रेमिल झुकाव, और देसियों के प्रति रूखा बर्ताव बेढब है। फिर, बार-बार सीमित अंदाज, ऊँचे, हवाई दावे, वैज्ञानिकों विशेषज्ञों जैसे ऑडियेंस में भी घिसे-पिटे मुहावरे, उपदेश, आदि उन की समझ का भी सीमित दायरा दिखाता है। ऊँचे पद से वह थोड़ा ढँका जरूर रहा, पर छिपा नहीं…

logo