एसआईआर की सीमा सात दिन बढ़ी

Categorized as समाचार

नई दिल्ली। विपक्षी पार्टियों के दबाव और कई राज्यों में धीमी रफ्तार के कारण चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की डेडलाइन सात दिन के लिए बढ़ा दी है। चुनाव आयोग ने अपनी अधिसूचना में कहा है कि 12 राज्यों में चल रही एसआईआर की प्रक्रिया की समय सीमा एक हफ्ते बढ़ाई जा रही है। आयोग ने कहा है कि अब अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी 2026 को प्रकाशित की जाएगी।

एक हफ्ते की सीमा बढ़ाने के बाद मतदाताओं के नाम जोड़ने और हटाने के लिए मतगणना प्रपत्र जमा कराने और उसे अपलोड करने का काम अब 11 दिसंबर तक चलेगा। पहले यह काम चार दिसंबर तक होना था। गौरतलब है कि एसआईआर की प्रक्रिया चार नवंबर से शुरू हुई थी। एक हफ्ते की सीमा बढ़ने के बाद मसौदा सूची नौ दिसंबर की जगह 16 दिसंबर को जारी की जाएगी। इससे पहले बिहार में एसआईआर की प्रक्रिया पूरी हुई है। वहां एक महीने में मतगणना प्रपत्र भरने और अपलोड करने का एक महीने में हो गया था।

इसके बाद 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर के लिए 28 अक्टूबर को अधिसूचना जारी हुई थी और चार नवंबर से इसकी प्रक्रिया शुरू हुई थी। चुनाव आयोग ने शनिवार को जारी प्रेस बयान में बताया कि 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 51 करोड़ मतदाताओं के लिए बनाए गए मतगणना प्रपत्र में से 99.53 फीसदी फॉर्म लोगों तक पहुंचा दिए गए हैं। इनमें से लगभग 79 फीसदी फॉर्म का डिजिटलीकरण भी पूरा हो चुका है। इसका मतलब है कि घर घर से बूथ लेवल अधिकारी यानी बीएलओ जो फॉर्म भरकर लाते हैं, उनमें लिखे नाम, पते और अन्य ब्योरे को ऑनलाइन सिस्टम में दर्ज किए जा चुके हैं।

हालांकि कई राज्यों जैसे केरल में मतगणना प्रपत्र अपलोड करने की प्रक्रिया बहुत धीमी है। उत्तर प्रदेश में भी यह प्रक्रिया धीमी है। इस बीच यह भी खबर है कि देश के अलग अलग राज्यों में काम के दबाव की वजह से दो दर्जन से ज्यादा बीएलओ की मौत हो गई है या उन्होंने खुदकुशी कर ली है। इसे लेकर विपक्ष लगातार हमलावर है। पिछले दिनों तृणमूल कांग्रेस के सांसदों की एक टीम चुनाव आयोग से मिली थी और बीएलओ की मौत को हत्या बताया था। तृणमूल ने कहा था कि इन हत्याओं की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है।

कांग्रेस ने भी एसआईआर के दौरान काम के दबाव के चलते जान गंवाने वाले बीएलओ की मौत को हत्या बताया था। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा था कि 20 दिनों में 26 बीएलओ की मौत दिनदहाड़े हत्या जैसी है। कांग्रेस प्रवक्ता ने गोंडा के बीएलओ विपिन यादव का जिक्र करते हुए कहा कि उनके परिवार ने बताया है कि उन पर वोटर लिस्ट से पिछड़े वर्ग के लोगों के नाम हटाने का दबाव था। बहरहाल, एसआईआर का मामला सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा हुआ है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने केरल सरकार की याचिका पर केंद्र और राज्य चुनाव आयोग से एक दिसंबर तक जवाब देने को कहा है। अगली सुनवाई दो दिसंबर को होगी।


Previous News Next News

More News

विपक्ष कैसे रोक देता है सरकार को?

April 23, 2026

सरकार अपने जिस एजेंडे को लागू करने में किसी भी कारण से विफल हो जाती है उसके बारे में कहा जाता है कि विपक्ष ने और खास कर कांग्रेस ने नहीं करने दिया। दूसरी प्रादेशिक पार्टियों पर भी ठीकरा फोड़ा जाता है। हैरानी की बात है कि सरकार इतनी शक्तिशाली है, जिसने तमाम विवादित मुद्दों…

बिहार में कांग्रेस की मुश्किल

April 23, 2026

बिहार में कांग्रेस पार्टी के छह विधायक जीते थे। चुनाव नतीजों के कुछ दिन बाद राहुल गांधी ने सभी विधायकों को दिल्ली बुला कर एक बैठक की थी और कहा गया था कि जल्दी ही विधायक दल का नेता चुना जाएगा। लेकिन पांच महीने बाद भी कांग्रेस ने विधायक दल का नेता नहीं चुना है।…

ममता को बाहरी वोट की चिंता क्यों?

April 23, 2026

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी इस बार परेशान बताई जा रही हैं। लेकिन कोलकाता के जानकार लोगों के कहना है कि यह कोई नई बात नहीं है। हर चुनाव में वे परेशान होती हैं लेकिन अंत में जीत उनकी होती है। अब पता नहीं चार मई को नतीजा क्या…

स्टालिन को सहयोगियों से मदद नहीं

April 23, 2026

तमिलनाडु में एमके स्टालिन और उनकी पार्टी डीएमके सबसे ज्यादा भरोसे में है। पार्टी जीत के प्रति आश्वस्त है। लेकिन जानकार सूत्रों का कहना है कि स्टालिन और उनके बेटे उदयनिधि को यह अंदाजा है कि इस बार पहले जितनी सीटें नहीं आ रही हैं। पिछली बार डीएमके ने 133 सीट अकेले जीती थी। उसने…

चेतना संचार और पतितपावनी गंगा

April 23, 2026

वैशाख शुक्ल सप्तमी, जिसे गंगा सप्तमी या जह्नु सप्तमी कहा जाता है, गंगा के दूसरे जन्म का प्रतीक पर्व है। कथा के अनुसार जब गंगा ने ऋषि जह्नु के यज्ञ स्थल को जलमग्न कर दिया, तो उन्होंने क्रोध में गंगा को पी लिया और बाद में अपने कान से उन्हें पुनः बाहर निकाला। यह प्रसंग…

logo