पहल के पीछे कौन?

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क्या भारत जम्मू-कश्मीर मसले को द्विपक्षीय वार्ता की मेज पर लाने को तैयार होगा? या पाकिस्तान इसके बिना बातचीत के लिए राजी हो जाएगा? अथवा, फिलहाल तनाव नियंत्रित रखने भर की सोच दोनों देश अपनाएंगे?

भारत और पाकिस्तान के 117 व्यक्तियों ने नरेंद्र मोदी और शहबाज शरीफ को पत्र लिख कर दोनों देशों में द्विपक्षीय संवाद तुरंत बहाल करने की मांग की है। यह हालिया घटनाक्रम में जुड़ी नई कड़ी है। सबसे पहले आरएसएस नेता दत्तात्रेय होसबोले ने ये चौंकाने वाला बयान दिया था कि भारत और पाकिस्तान में जन संपर्क बहाल करने का प्रयास होना चाहिए। फिर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने उनकी राय का समर्थन किया। उसके बाद आरएसएस के प्रचार प्रमुख सुनील अंबेकर ने पाकिस्तान की जनता से संपर्क बनाने का पक्ष लिया।

इसी दौरान खबर आई कि भारत और पाकिस्तान के बीच ‘ट्रैक-2 डिप्लोमैसी’ शुरू हुई है। बताया गया कि उस क्रम में हुई दो बैठकों में से एक में भाजपा नेता राम माधव के भी भाग लिया। और अब दोनों देशों की सिविल सोसायटी ने ताजा पहल की है। मगर मुद्दा है कि जिन वजहों से अनबोलापन बढ़ा और पिछले साल चार दिन का युद्ध हुआ, क्या वे दूर हो गई हैं? क्या नरेंद्र मोदी सरकार जम्मू-कश्मीर मसले को द्विपक्षीय वार्ता की मेज पर लाने को तैयार होगी? या पाकिस्तान इसके बिना बातचीत के लिए राजी हो जाएगा? अथवा, उलझे विवादों को फिलहाल छोड़कर तनाव नियंत्रित रखने की सोच दोनों देश अपनाएंगे? आरएसएस और भाजपा के लिए पाकिस्तान और उससे संबंध विचारधारात्मक प्रश्न रहे हैं। मोदी सरकार की विदेश नीति उससे प्रभावित रही है।

मगर अब उस रुख में नरमी क्यों आ रही है? इस सिलसिले में दो पहलू उल्लेखनीय हैं। पिछले वर्ष ऑपरेशन सिंदूर के समय युद्धविराम का विवरण देते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा था कि भारत और पाकिस्तान जल्द ही किसी तटस्थ स्थल पर कश्मीर सहित सभी मुद्दों पर द्विपक्षीय वार्ता शुरू करेंगे। क्या अमेरिका से भारत सरकार की कोई ऐसी बात हुई थी, जिसे पूरा करने के लिए ट्रंप प्रशासन दबाव डाल रहा है? उधर ऐसी खबरें हैं कि पाकिस्तान का वायु क्षेत्र बंद होने के कारण घाटा सह रही भारतीय एयरलाइन कंपनियां इस समस्या का समाधान निकालने के लिए भारत सरकार पर दबाव डाल रही हैं। क्या ऐसे प्रभावशाली हित ताजा पहल के पीछे हैं?


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