ब्रिक्स समूह का मोर्चा

ब्राजील, चीन, रूस और दक्षिण अफ्रीका के अलावा बाकी लगभग सभी देशों ने अमेरिकी टैरिफ वॉर की सीधी आलोचना से बचने की कोशिश की। ब्रिक्स+ की यही समस्या है। इसमें अधिकांश ऐसे देश शामिल हैं, जो दोनों ओर पांव रखना चाहते हैँ। ब्रिक्स+ में अमेरिका के टैरिफ वॉर को लेकर नाराजगी है, लेकिन यह भी… Continue reading ब्रिक्स समूह का मोर्चा

सुलगता हुआ भू-तल

जब बेहतर जिंदगी के अवसरों का अभाव हो- और उस कारण सतह के नीचे की जमीन सुलग रही हो, तो हल्की-सी किसी चिंगारी भी आग भड़का देती है। नेपाल में ऐसी चिंगारियों के संकेत हाल में लगातार मिले हैं। नेपाल में सोशल मीडिया कंपनियों को पंजीकृत करवाने के लिए किए गए प्रावधान को अनुचित नहीं… Continue reading सुलगता हुआ भू-तल

अब इवेंट का वक्त!

जीएसटी काउंसिल की बैठक के बाद शेयर बाजार के रुझान पर कोई फर्क नहीं पड़ा है। ठीक उसी तरह, जैसे इस वर्ष के बजट में तकरीबन एक करोड़ लोगों को आय कर से मुक्ति देने के सरकार के निर्णय पर हुआ था। प्रधानमंत्री ने सत्ताधारी एनडीए के नेताओं से कहा है कि जीएसटी की दो… Continue reading अब इवेंट का वक्त!

खाई और ना बढ़ाएं

सारे देश में एसआईआर से संबंधित निर्वाचन आयोग की बैठक में इस पर अवश्य विचार होना चाहिए कि आयोग में विपक्षी समूहों का भरोसा क्यों घट रहा है? कथित वोट चोरी के आरोपों पर जनमत का एक हिस्सा क्यों यकीन करने लगा है? बिहार में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से संबंधित याचिकाओं… Continue reading खाई और ना बढ़ाएं

पांच साल, पांच पीएम

जापान में 1955 में वर्तमान संविधान लागू होने के बाद के 70 वर्षों में से 66 साल एलडीपी ही सत्ता में रही है। फिर भी देश राजनीतिक अस्थिरता के दौर में है। उसकी वजहें देश में गहराया मायूसी का माहौल है। जापान में 2020 के बाद से हर साल प्रधानमंत्री बदलने का सिलसिला आगे बढ़… Continue reading पांच साल, पांच पीएम

मणिपुर का जटिल रास्ता

मैतई और कुकी-जो के बीच अविश्वास की खाई इतनी गहरा चुकी है कि उनमें से किसी एक को पसंद आने वाले करार से दूसरा समुदाय भड़क जाता है। दोनों समुदायों के बीच भड़की हिंसा के बाद से हालात सुलगते रहे हैं। केंद्र और मणिपुर के कुकी-जो समुदाय के विद्रोही संगठनों के बीच एक दूसरे पर… Continue reading मणिपुर का जटिल रास्ता

आर-पार की शर्त

अमेरिकी शर्त है कि भारत को अपना बाजार खोलना होगा। उसे रूसी तेल की खरीद रोकनी होगी। ब्रिक्स का साथ छोड़ना होगा। डॉलर को समर्थन देना होगा। वह या तो अब अमेरिका के साथ रह सकता है, या चीन- रूस के साथ। डॉनल्ड ट्रंप का भारत के खिलाफ सुर नरम हुआ है। उससे भारत के… Continue reading आर-पार की शर्त

आर्थिक, या भूल सुधार?

अनेक वस्तुओं एवं सेवाओं पर जीएसटी घटाई गई है। इससे लोगों को राहत मिलेगी। यह स्वागतयोग्य है। मगर इसे पहले किए गए भूल का सुधार ही माना जाना चाहिए। इससे बहुत ज्यादा उम्मीद जोड़ने की जरूरत नहीं है। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की दो दरें खत्म करने और कुछ वस्तु एवं सेवाओं पर टैक्स… Continue reading आर्थिक, या भूल सुधार?

आरएसएस का अर्थ-चिंतन

संघ के अर्थ-समूह में कही गई बातें मोदी सरकार की आर्थिक सफलता के दावों का सिरे से खंडन करती हैँ। कहा जा सकता है कि ये भारत की जमीनी माली हालत का उचित वर्णन हैं। हालांकि ये बातें नई नहीं हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ‘अर्थ समूह’ की बैठक में वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी… Continue reading आरएसएस का अर्थ-चिंतन

इंसाफ का सवाल है

ये दलील अपनी जगह सटीक है कि अगर राष्ट्र के खिलाफ किसी ने कुछ किया है, तो उसे जेल में रहना चाहिए। मगर ऐसे इल्जाम न्यायिक प्रक्रिया के अंजाम पर पहुंचने से तय होंगे, या महज आरोप भर लग जाने से? फिलहाल मुद्दा यह नहीं है कि उमर खालिद, मीरान हैदर, गुलफिशा फातिमा, शिफा उर… Continue reading इंसाफ का सवाल है

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