‘मुफ्त की रेवड़ी’ और ममदानी मॉडल का फर्क

जब से जोहरान ममदानी न्यूयॉर्क के मेयर का चुनाव जीते हैं तब से अमेरिका से ज्यादा उनकी चर्चा भारत में हो रही है। भारत का राइट विंग इकोसिस्टम पूरी गंभीरता से और कुछ स्वतंत्र विश्लेषक मजाकिया अंदाज में बता रहे हैं कि आखिर ममदानी भी मुफ्त की रेवड़ी का वादा करके चुनाव जीत गए। उनका… Continue reading ‘मुफ्त की रेवड़ी’ और ममदानी मॉडल का फर्क

एआई चापलूस, झूठा और प्रोपेगेंडा मशीन?

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई को लेकर पूरी दुनिया अद्भुत अचम्भे में है। जीवन के हर क्षेत्र में इसके महत्व और इसकी जरुरत को प्रमाणित करने के दावे किए जा रहे हैं। इसका असर भी दिख रहा है। एआई के कारण बड़ी टेक कंपनियों के सीईओ की सैलरी बढ़ रही है और कंपनियों के शेयरों की… Continue reading एआई चापलूस, झूठा और प्रोपेगेंडा मशीन?

भारतीयों में देश छोड़ने की होड़

पहले कुछ आंकड़ों से ही बात शुरू करते हैं। ऑर्गेनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक कोऑपरेशन एंड डेवलपमेंट यानी ओईसीडी की ओर से सोमवार, तीन नवंबर को इंटरनेशनल माइग्रेशन आउटलुक 2025 जारी किया गया। इसके मुताबिक 2023 में सवा दो लाख भारतीयों ने ओईसीडी समूह के देशों की नागरिकता हासिल की। इस अवधि में पूरी दुनिया से करीब… Continue reading भारतीयों में देश छोड़ने की होड़

चुनाव में क्या कुछ भी वादा किया जा सकता है?

राजनीतिक दलों और नेताओं में आखिर इतनी हिम्मत कहां से आती है कि वे चुनाव से पहले कुछ भी वादा कर देते हैं? लोकतंत्र के लिए यह बहुत जरूरी सवाल है और इसका सीधा सरल जवाब यह है कि चूंकि जनता चुनाव के बाद नेताओं को जवाबदेह नहीं ठहराती है, उनसे उनके वादों के बारे… Continue reading चुनाव में क्या कुछ भी वादा किया जा सकता है?

आंकड़े छिपाने से हकीकत नहीं बदलती

हर साल नवंबर, दिसंबर में दिल्ली में हिंदी फिल्मों का यह गाना खूब चर्चा में रहता है कि ‘आंखों में जलन, सीने में तूफान सा क्यूं है, इस शहर में हर शख्स परेशान सा क्यूं है’। इस साल भी ऐसा ही है। आंखों में जलन है, गले में खराश है, सीने में तूफान सा है,… Continue reading आंकड़े छिपाने से हकीकत नहीं बदलती

एसआईआर में सावधानी बरतने की जरुरत

चुनाव आयोग मतदाता सूची की सफाई के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर का दूसरा चरण शुरू कर चुका है। अगले साल चुनाव वाले चार राज्यों के साथ साथ 12 राज्यों में यह प्रक्रिया चलेगी। इन 12 राज्यों में मतदाता सूची फ्रीज कर दी गई है और चार नवंबर से पहले चरण यानी मतगणना प्रपत्र… Continue reading एसआईआर में सावधानी बरतने की जरुरत

बचत से कर्ज की ओर बढ़ रहा है भारत

भारत के प्राचीन दर्शन में कर्ज लेकर घी पीने की सलाह देने वाले ऋषि भी हुए हैं। कर्ज की मय पीकर फाकामस्ती के रंग लाने की उम्मीद पालने वाले शायर भी हुए। लेकिन भारत के लोगों ने कभी भी कर्ज लेकर घी या मय पीने को जीवन का सिद्धांत नहीं बनाया। इसकी बजाय भारत मितव्ययिता… Continue reading बचत से कर्ज की ओर बढ़ रहा है भारत

प्रवासी बिहारियों की मुश्किलों का हल नहीं!

देश के अलग अलग हिस्सों से मीडिया और सोशल मीडिया में तस्वीरें आ रही हैं कि कैसे बिहार के लोग ट्रेन की बोगियों में घुसने के लिए स्टेशनों पर धक्कामुक्की कर रहे हैं। कैसे गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के स्टेशनों के बाहर लंबी लंबी कतारों में घंटों खड़े रह रहे हैं और उसके… Continue reading प्रवासी बिहारियों की मुश्किलों का हल नहीं!

पटाखे चलाना भी धर्म का काम!

इस साल भी और पिछले कई सालों से दिवाली के मौके पर ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ से ज्यादा ‘धर्मो रक्षति रक्षितः’ के संदेश देखने को मिले। अंधकार से प्रकाश की ओर चलने या असत्य से सत्य की ओर बढ़ने से ज्यादा हर व्यक्ति धर्म की रक्षा को आतुर दिखा और धर्म की रक्षा कैसे होगी? पटाखे… Continue reading पटाखे चलाना भी धर्म का काम!

जाति आधारित पार्टियां लोकतंत्र का भविष्य हैं!

क्या इसे भारत में अपनाई गई बहुदलीय लोकतंत्र के मजबूत होने का संकेत मानें या कुछ और कि भारत में लगातार राजनीतिक दलों की संख्या बढ़ रही है? हर चुनाव से पहले राज्यों में कई नई पार्टियां बनती हैं। हर पार्टी को कोई न कोई गठबंधन मिल जाता है। राष्ट्रीय स्तर पर दो बड़े गठबंधन… Continue reading जाति आधारित पार्टियां लोकतंत्र का भविष्य हैं!

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