बिहार में धर्मांतरण विरोधी कानून की मांग, 18 विधायकों ने विधानसभा में उठाया मुद्दा

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बिहार में ‘धर्मांतरण’ के खिलाफ सख्त कानून बनाने की मांग उठी है। इस संबंध में बजट सत्र के आखिरी दिन शुक्रवार को विधानसभा में सत्तारूढ़ दल के कई सदस्यों ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव दिया।

मैथिली ठाकुर, मिथिलेश तिवारी, वीरेंद्र कुमार, जनक सिंह, संजय कुमार सिंह, जीवेश कुमार, तार किशोर प्रसाद और बैद्यनाथ प्रसाद समेत सत्ताधारी गठबंधन के 18 विधायकों ने यह मुद्दा उठाया। उन्होंने दूसरे राज्यों की तरह ही बिहार में ‘धर्मांतरण’ के खिलाफ कानून बनाने की मांग की।

विधायकों ने कहा कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात जैसे राज्यों ने धर्म बदलने के खिलाफ कानून लागू किए हैं। इन कानूनों में धोखाधड़ी से धर्मांतरण, बाल विवाह या प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराने के मामलों में एक से 10 वर्ष या कुछ मामलों में 20 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है।

सत्तापक्ष के विधायकों ने यह भी दावा किया कि बिहार के कुछ हिस्सों में डेमोग्राफी बदली है, जिसे देखते हुए कानूनी दखल की जरूरत है। उन्होंने सीमावर्ती जिलों के हालात पर चिंता जताई और आरोप लगाया कि बड़े पैमाने पर धर्म परिवर्तन हो रहा है।

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भाजपा विधायक मिथिलेश तिवारी ने कहा, “उत्तर प्रदेश में सख्त कानून हैं और बिहार में भी ऐसा ही कानून बनना चाहिए। अकेले बक्सर में 1,000 दलित परिवारों ने धर्म परिवर्तन किया है। इसलिए, इस धर्मांतरण विरोधी कानून की जरूरत है। सरकार को इस पर सोचना चाहिए।

कुछ विधायकों ने बिहार में आबादी बढ़ने और चर्च बनने के आंकड़ों का हवाला दिया। इसके साथ ही आरोप लगाया कि लालच देकर धर्म परिवर्तन हो रहे हैं। कुछ सदस्यों ने धर्म परिवर्तन के बाद आरक्षण के फायदों पर भी सवाल उठाए और अपनी दलीलों में संवैधानिक नियमों का जिक्र किया।

पर्यटन और कला एवं संस्कृति मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने विधानसभा में जवाब दिया कि बिहार सरकार के पास अभी धर्म परिवर्तन से जुड़ा कानून लाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। मंत्री ने सदन में कहा इस समय इससे जुड़ा कोई कानून बनाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

वहीं, विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने कहा कि ध्यानाकर्षण प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया है और जरूरत पड़ने पर सरकार मामले की समीक्षा करेगी। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर आगे कोई चर्चा नहीं होगी।

Pic Credit : ANI


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