नई दिल्ली। मेडिकल में दाखिले के लिए होने वाली नीट यूजी और नीट पीजी सहित दो दर्जन से ज्यादा अखिल भारतीय परीक्षाओं का आयोजन करने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए में सुधार का सुप्रीम कोर्ट ने मिशन बनाया है। सर्वोच्च अदालत ने कहा है एनटीए में सुधार के लिए क्या क्या किया जा रहा है इसका पूरा ब्योरा वेबसाइट पर डालना होगा। अदालत ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर नीट परीक्षा सिस्टम की जांच के लिए जज एनटीए के ऑफिस का दौरा करेंगे। वे देखेंगे कि परीक्षा को सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से कराने के इंतजाम वास्तव में काम कर रहे हैं या नहीं।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस अलोक अराधे की बेंच ने शुक्रवार को यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई की। इसमें एनटीए को भंग करने और पेपर लीक रोकने के लिए मजबूत निगरानी सिस्टम की मांग की गई है। इसी मामले की सुनवाई में 19 अगस्त को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि नीट परीक्षा सिस्टम फूलप्रूफ है। इसमें सेंध लगाना मुश्किल है। हालांकि पिछले तीन साल में दो बार पेपर लीक हुए हैं और परीक्षा में गड़बड़ी हुई है। 2024 में कई सेंटर्स पर दोबारा परीक्षा हुई और 2026 पूरी परीक्षा ही रद्द हुई।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए को अपने सुधारों और अब तक हुई प्रगति का ब्योरा वेबसाइट पर डालने का निर्देश दिया है। इससे परीक्षा व्यवस्था में हो रहे बदलावों की जानकारी सार्वजनिक होगी। सुनवाई के दौरान एनटीए के लिए पर्याप्त स्थायी कर्मचारी और विशेषज्ञ स्टाफ रखने की जरूरत पर चर्चा हुई। कोर्ट ने बेहतर मैनपावर, प्रशिक्षण, इंफ्रास्ट्रक्चर और संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत बताई।
एनटीए को मजबूत कानूनी आधार देने के लिए वैधानिक व्यवस्था पर भी विचार किया गया। कोर्ट ने कहा कि लिखित परीक्षा से डिजिटल परीक्षा की ओर बदलाव अचानक नहीं किया जा सकता। इसे धीरे धीरे लागू करना होगा, ताकि नई व्यवस्था में परेशानी न हो। सुनवाई के दौरान केंद्र ने कोर्ट को बताया कि नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली उच्च अधिकारी प्राप्त पैनल की पहली अंतरिम रिपोर्ट सितंबर के अंत तक आने की संभावना है। सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर दोहराया कि नीट परीक्षा के लिए एनटीए को यूपीएससी जैसा मजबूत सिस्टम बनाना चाहिए, जिसमें परीक्षा कराने का अनुभव अधिकारियों के ट्रांसफर होने के बाद भी संस्था के पास बना रहे।
