सपा और कांग्रेस तालमेल करेंगे

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समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के संबंधों में जो सिलवटें दिख रही थीं उनको दूर करने की कोशिश शुरू हो गई है। पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजों के बाद समाजवादी पार्टी को समझ में आया है कि चाहे जातीय समीकऱण जितना भी मजबूत होने का दावा किया जाए लेकिन विधानसभा चुनाव में भाजपा को हराने के लिए अतिरिक्त ताकत की जरुरत है। वह अतिरिक्त ताकत कांग्रेस से मिल सकती है। सपा के एक बड़े नेता ने कहीं अनौपचारिक बातचीत में कहा कि लोकसभा में सपा ने भले 37 और कांग्रेस ने छह सीटें जीती हैं लेकिन उसके आधार पर विधानसभा चुनाव में जीत पक्की नहीं मानी जा सकती है। उन्होंने पश्चिम बंगाल की मिसाल दी और कहा कि वहां भी 2024 में तृणमूल कांग्रेस ने 29 सीटें जीती थीं और भाजपा 18 से घट कर 12 सीट पर आ गई थी लेकिन विधानसभा चुनाव में भाजपा ने तृणमूल का सूपड़ा साफ कर दिया। सपा के नेता पश्चिम बंगाल में कांग्रेस, लेफ्ट और हुमायूं कबीर व नौशाद सिद्दीकी की पार्टियों को मिले वोट का आंकड़ा भी दिखा रहे हैं। उनको लग रहा है कि कांग्रेस और अन्य सेकुलर पार्टियां उत्तर प्रदेश में सपा का खेल बिगाड़ सकती हैं।

तभी जानकार सूत्रों का कहना है कि दोनों पार्टियों ने एक दूसरे को मैसेज भिजवा दिया है कि साथ लड़ना है। आठ जून को दिल्ली में विपक्षी गठबंधन की बैठक होगी उसमें मुख्य फोकस राहुल गांधी और अखिलेश यादव पर ही होगा। कांग्रेस और सपा ही अब विपक्षी गठबंधन को आगे बढ़ाएंगे। चुनाव हारने के बाद ममता बनर्जी बहुत कमजोर हो गई हैं और अगर पार्टी टूटती है तो उनके लिए और भी समस्या होगी। उधर डीएमके अलग हो गई है। कांग्रेस ने उसे छोड़ कर टीवीके से हाथ मिला लिया है। इसलिए अब कांग्रेस और सपा पर जिम्मेदारी है कि वे भाजपा विरोधी पार्टियों को एकजुट रखें और संसद के बाहर व भीतर विपक्ष की राजनीति का समन्वय बनाएं। वैसे भी अगले साल जिन राज्यों में चुनाव होना है उनमें सबसे अहम उत्तर प्रदेश ही है, जहां ये दोनों पार्टियां मिल कर लड़ें तो कुछ असर डाल सकती हैं।

जानकार सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस की ओर से 102 सीटों की सूची तैयारी की जा रही है। इसके लिए पार्टी ने सभी 403 सीटों पर कम से कम पांच पांच नाम मंगवाए हैं। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी 75 से 80 सीटें कांग्रेस को देने की तैयारी कर रही है। बताया जा रहा है कि समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव भी अपनी ओर से ऐसी सीटों की सूची तैयार कर रहे हैं, जो कांग्रेस को दी जा सकती है। पार्टी के एक जानकार नेता का कहना है कि सीटों की संख्या पर ज्यादा समस्या नहीं होगी। सीटों की क्वालिटी पर समस्या होगी। यह भी बताया जा रहा है कि अखिलेश यादव ने अपनी पार्टी के सभी सांसदों से कहा है कि वे अपने क्षेत्र की एक सीट का नाम बताएं जो कांग्रेस को दी जा सकती है। इसे भी जाहिर होता है कि समाजवादी पार्टी राज्य की 80 लोकसभा सीटों मे से हर सीट पर औसतन एक एक सीट कांग्रेस को देने की योजना बना रही है। जिन लोकसभा सीटों पर सपा के सांसद नहीं हैं वहां चुनाव लड़े प्रत्याशी और पार्टी विधायकों से फीडबैक मांगी गई है। कांग्रेस को लग रहा है कि सपा अपने सांसदों और विधायकों की राय लेकर कमजोर सीटों की सूची बना रही है, जो वह कांग्रेस को देना चाहेगी। दूसरी ओर कांग्रेस कम से कम 50 ऐसी मजबूत सीटों की सूची बना रही है, जिन पर सपा और कांग्रेस का समीकरण चुनाव जीतने लायक है। इनमें पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश की सीटें ज्यादा हैं। कांग्रेस अखिलेश के परिवार के मजबूत असर वाले इलाकों में भी सीट चाहती है।


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