पंजाब में कलह से परेशान कांग्रेस

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पंजाब में अगले साल मार्च में विधानसभा चुनाव होने वाला है। उससे पहले स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया। उसके बाद पार्टी के अंदर घमासान बढ़ गया है। पिछले दिनों पार्टी नेताओं की पंजाब को लेकर बैठक हुई तो विधायक दल के नेता प्रताप सिंह बाजवा बैठक के बीच में ही निकल कर चले गए। वैठक में नेता साफ साफ खेमों में बंटे हुए दिखे। प्रदेश अध्यक्ष राजा अमरिंदर सिंह वारिंग के अलावा सुखजिंदर सिंह रंधावा के खेमे अलग हैं तो पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की अलग राजनीति चल रही है। स्थानीय निकाय चुनावों के बाद राणा गुरजीत सिंह का जलवा बना है क्योंकि उन्होंने अपने इलाके में पार्टी को जीत दिलाई।

चरणजीत सिंह चन्नी को वैसे भी पार्टी ज्यादा महत्व दे रही थी लेकिन चमकौर साहिब इलाके में स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस के प्रदर्शन के बाद उनकी पूछ बढ़ी है। इसके उलट गिद्दरबाह इलाके में कांग्रेस बुरी तरह से हारी है, जिसके बाद राजा अमरिंदर सिंह वारिंग सबके निशाने पर आए हैं। इस बीच प्रदेश अध्यक्ष बदलने की चर्चा भी शुरू हो गई है। हालांकि राज्य के प्रभारी भूपेश बघेल इससे इनकार कर रहे हैं लेकिन कांग्रेस आलाकमान को लग रहा है कि वारिंग के नेतृत्व में चुनाव जीतना मुश्किल होगा। ध्यान रहे वारिंग और रंधावा दोनों 2022 में विधानसभा का चुनाव जीते थे और 2024 में जब दोनों सांसद बन गए तो उनकी सीटों पर उपचुनाव हुआ और कांग्रेस दोनों सीटें हार गई। वारिंग और रंधावा दोनों ने अपनी अपनी पत्नी को चुनाव लड़ाया था। दोनों हार गए थे। बहरहाल, पंजाब में जो अंदरूनी खींचतान हो रही है वह कांग्रेस के लिए नुकसानदेह होने वाली है।


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