वेणुगोपाल की अब क्या हैसियत है

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कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल को लेकर अब दो तरह की चर्चा है। उनके करीबियों का कहना है कि उन्होंने केरल में मुख्यमंत्री पद का त्याग किया, जिसकी वजह से उनका कद बढ़ गया है। कुछ पत्रकार भी इस लाइन को आगे बढ़ा रहे हैं। दूसरी ओर कांग्रेस नेताओं का एक खेमा है, जो कह रहा है कि वेणुगोपाल ने पूरी मेहनत की और मुख्यमंत्री नहीं बन पाए इससे उनकी हैसियत बहुत कम है। यह धारणा बनी है कि जब वे खुद अपने लिए कुछ नहीं ले सकते हैं तो दूसरे किसी नेता क्या दिलवा सकते हैं? इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह दूसरी धारणा ज्यादा तार्किक और सही है। कांग्रेस नेता वेणुगोपाल की हैसियत का अंदाजा इसी आधार पर कर रहे हैं कि उन्होंने केरल का मुख्यमंत्री बनने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी थी। लेकिन राहुल गांधी ने उनको नहीं बनाया।

राहुल और प्रियंका गांधी ने अंतिम फैसला वीडी सतीशन के पक्ष में किया। कहा जा रहा है कि कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ता उनको चाहते थे और पार्टी की सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने भी उनके नाम पर वीटो किया था। दोनों बातें सही हैं। लेकिन अगर राहुल गांधी केसी वेणुगोपाल को बनाते तब भी कोई सवाल नहीं उठता। यह खबर पहले मीडिया में बड़ी होशियारी से लीक कर दी गई थी कि कांग्रेस के 63 में से 43 विधायक वेणुगोपाल के पक्ष में हैं। यह भी खबर खूब चल रही थी कि उन्होंने टिकट बांटे थे इसलिए उनको प्रति वफादार लोग ज्यादा जीते हैं। लेकिन जब सतीशन का फैसला हुआ तो एक भी विधायक ने सवाल नहीं उठाया। सो, वेणुगोपाल की हैसियत अब समय काटने वाली हो गई है। असल में वेणुगोपाल को अहमद पटेल से सीखना चाहिए था। अहमद पटेल के सामने 10 साल कांग्रेस की सरकार रही लेकिन कभी भी उन्होंने मंत्री बनने की सोची भी नहीं। तभी सारे मंत्री और मुख्यमंत्री उनके दरवाजे पर सजदा करते थे। वेणुगोपाल ने खुद मुख्यमंत्री बनने का प्रयास करके अपनी हैसियत बहुत घटा ली है।


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