परजीवी होने में भाजपा और कांग्रेस का अंतर

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस को परजीवी पार्टी कहा है। उन्होंने कई बार पहले भी यह बात कही है। इस बार रविवार को दक्षिण भारत के दौरे पर उन्होंने यह बात कही। यह संयोग है कि जिस समय प्रधानमंत्री ने यह तंज किया उस समय तमिलनाडु की नई सरकार शपथ ले रही थी और मंच पर मुख्यमंत्री विजय के साथ राहुल गांधी भी बैठे हुए थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस अब परजीवी पार्टी हो गई है। यह बात एक स्तर पर सही है। हालांकि अभी जिन तीन राज्यों में कांग्रेस की सरकार है वह सरकार उसने अपने दम पर बनाई है। कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश में उसे अकेले पूर्ण बहुमत है। उसने किसी सहयोगी पार्टी के साथ भी चुनाव नहीं लड़ा था। चौथा राज्य केरल है, जहां कांग्रेस की सरकार बनेगी। वहां जरूर वह एक गठबंधन के साथ लड़ी थी। फिर भी कांग्रेस ने 140 के सदन में 63 सीटें अकेले जीती है। यानी वह बहुमत के करीब अपने दम पर पहुंच गई है। अगर कांग्रेस के दूसरी पार्टियों पर निर्भरत की बात करें तो कुछ राज्य जरूर हैं, जहां कांग्रेस निर्भर है। जैसे बिहार, उत्तर प्रदेश आदि। लेकिन ज्यादातर राज्यों में कांग्रेस हारे या जीते अकेले ही राजनीति करती है। एक श्रेणी ऐसे राज्यों की है, जहां कांग्रेस गठबंधन में है लेकिन उसकी ताकत भी कम नहीं है और वहां गठबंधन नहीं होने से प्रादेशिक पार्टियों को नुकसान हो सकता है।

बहरहाल, एक समय ऐसा भी रहा है, जब थोड़े से राज्यों को छोड़ दें तो भारतीय जनता पार्टी हर जगह गठबंधन के सहारे ही चलती रही है। देश के ज्यादातर राज्यों में भले भाजपा ने सरकार बना ली है लेकिन थोड़े समय पहले ही हर राज्य में उसकी निर्भरता किसी न किसी दल के ऊपर थी। महाराष्ट्र में वह शिव सेना के दम पर फली फूली तो बिहार में नीतीश कुमार की समता पार्टी या जनता दल यू के दम पर आगे बढ़ी। तमिलनाडु में अन्ना डीएमके या डीएमके से उसका तालमेल रहता था तो आंध्र प्रदेश में टीडीपी के साथ। पंजाब में वह अकाली दल के दम पर खड़ी थी तो हरियाणा में इंडियन नेशनल लोकदल के दम पर।

अब अगर कांग्रेस और भाजपा के फर्क की बात करेंगे तो वह भी साफ दिखाई देगा। कांग्रेस जिन पार्टियों के साथ रही उनमें से ज्यादातर पार्टियां आज भी हैं और मजबूत हैं। दूसरी ओर भाजपा जिन पार्टियों के साथ रही वे आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही हैं। जीव विज्ञान में परजीवी यानी पैरासाइट उन सूक्ष्म जीवों को कहते हैं जो दूसरे का रक्त चूस कर जीवित रहते हैं। कुछ पैरासाइट ऐसे होते हैं, जो होस्ट को भी जीवित रखते हैं और खुद भी जीवित रहते हैं। लेकिन कुछ पैरासाइट ऐसे होते हैं, जो होस्ट का समाप्त कर देते हैं। अलग अलग राज्यों में भाजपा के जो सहयोगी थे उनकी स्थिति देखें तो एक साफ तस्वीर सामने आती है। महाराष्ट्र में शिव सेना बड़ी ताकत थी। उसके दम पर भाजपा आगे बढ़ी लेकिन आज शिव सेना और ठाकरे परिवार अस्तित्व की लडाई लड़ रहा है। बिहार में जनता दल यू बड़ी पार्टी थी। आज उसकी जगह भाजपा सरकार में है और जदयू के सामने अस्तित्व का संकट है। पंजाब में अकाली दल और हरियाणा में इनेलो लगभग समाप्त हो गए हैं। ओडिशा में बीजू जनता दल की स्थिति भी ऐसी ही है। झाऱखंड में आजसू के सामने भी अस्तित्व का संकट है। अभी भाजपा के साथ जो भी सहयोगी हैं वे सब भाजपा की कृपा पर हैं। अब किसी का ऐसा अस्तित्व नहीं है कि वह स्वतंत्र राजनीति कर सके।


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