कांग्रेस पार्टी के नेता खुश हैं!

Categorized as राजनीति

वैसे तो राहुल गांधी के ऊपर चुनाव नतीजों का कोई फर्क नहीं पड़ता है। लोकसभा के चुनावों में कांग्रेस लगातार तीन बार से हार रही है और राज्यों में तो लगातार कांग्रेस की हार होती रहती है। पांच राज्यों के चुनाव में भी राहुल गांधी का रवैया कुछ ऐसा ही रहा तभी उन्होंने हर जगह आधे अधूरे तरीके से प्रचार किया और कांग्रेस ने उसी अंदाज में चुनाव लड़ा। फिर भी कहा जा रहा है कि कांग्रेस के नेता खुश हैं। राहुल गांधी भी खुश बताए जा रहे हैं। कांग्रेस में इस बात की खुशी है कि राज्यों के प्रादेशिक क्षत्रप कमजोर हो रहे हैं। कांग्रेस के वोट आधार पर राजनीति करने वाले प्रादेशिक क्षत्रपों को इस चुनाव में झटका लगा है। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस हारी हैं तो तमिलनाडु में एमके स्टालिन की पार्टी डीएमके तीसरे नंबर की पार्टी बन गई है। हालांकि डीएमके और कांग्रेस तालमेल करके चुनाव लड़े थे। लेकिन कांग्रेस के प्रदेश के नेता लगातार पांच साल तक डीएमके से लड़ते ही रहे थे।

कांग्रेस के लिए खुशी की दूसरी बात यह है कि केरल में उसके नेतृत्व में यूडीएफ को बड़ी जीत मिली है। इस तरह केरल चौथा राज्य बन रहा है, जहां कांग्रेस का मुख्यमंत्री बनेगा। यह स्थिति अगले साल के अंत तक रहेगी, जब तक हिमाचल प्रदेश का चुनाव नहीं आ जाता है। कांग्रेस के तीन से बढ़ कर चार राज्यों में सरकार में आने से पार्टी को संजीवनी मिली है। भाजपा इस बात के प्रयास कर रही थी कि केरल में कांग्रेस न जीत पाए और लेफ्ट को लगातार तीसरी बार सत्ता मिल जाए। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। ध्यान रहे तमिलनाडु में विपक्षी गठबंधन की सरकार थी लेकिन डीएमके ने कांग्रेस और दूसरी पार्टियों को सरकार से बाहर रखा था। इसलिए तकनीकी रूप से वहां सरकार में होने का कांग्रेस को कोई लाभ नहीं था। अब कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश के बाद केरल में कांग्रेस की सरकार बन रही है।

गौरतलब है कि राहुल गांधी पश्चिम बंगाल में अपील करके आए थे कि लोग ममता बनर्जी की पार्टी को हराएं क्योंकि उनकी वजह से राज्य में भाजपा के प्रवेश का रास्ता बना है और अब ममता बनर्जी की पार्टी चुनाव हार गई है। कांग्रेस के नेता मान रहे हैं कि बंगाल में ममता बनर्जी का हारना कांग्रेस के लिए संभावनाओं का रास्ता खोल सकता है। ध्यान रहे बंगाल में राजनीति हमेशा दो ध्रुवीय रही है। पहले कांग्रेस और वाम मोर्चा था। जब वाम मोर्चा जीता तो कांग्रेस साफ हो गई। इसके बाद वाम मोर्चा और तृणमूल कांग्रेस रहे। जब तृणमूल कांग्रेस जीती तो वाम मोर्चे का सफाया हो गया।

अब भाजपा आई है तो माना जा रहा है कि तृणमूल कांग्रेस का सफाया हो जाएगा। इससे कांग्रेस की वापसी का रास्ता बनेगा। भाजपा के मुकाबले कांग्रेस एक ताकत के तौर पर उभर सकती है। कांग्रेस को ऐसी ही उम्मीद तमिलनाडु में भी है। तमिलनाडु में द्रविडियन राजनीति को झटका लगा है। दशकों बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि डीएमके और अन्ना डीएमके दोनों हारे हैं और एक तीसरी ताकत का उदय हुआ है। फिल्मस्टार विजय ने पहले ही चुनाव में बड़ी जीत हासिल की है। अगर द्रविड राजनीति कमजोर होती है तो कांग्रेस इसका फायदा उठाने की कोशिश करेगी और निश्चित रूप से भाजपा भी इसका प्रयास करेगी। तभी विपक्ष के लिए भले बुरी खबर है कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में उनकी सरकार चली गई है लेकिन कांग्रेस के लोग इसे अच्छा मान रहे हैं कि केरल में उनकी सरकार आई है और दो राज्यों में पार्टी को आधार बढ़ाने का मौका मिलेगा।


Previous News Next News

More News

विजय छोटी पार्टियों के साथ सरकार बनाएंगे

May 6, 2026

तमिलनाडु में पहली बार त्रिशंकु विधानसभा बनी है। वहां आमतौर पर एक पार्टी को बहुमत मिलता रहा है और बिना किसी गठबंधन के सरकार बनती रही है। पिछले चुनाव में भी डीएमके को अकेले पूर्ण बहुमत मिला था। यही कारण था कि उसने कांग्रेस और दूसरी सहयोगी पार्टियों को सरकार में नहीं शामिल किया था।…

पंजाब में बंगाल दोहराने के सपने

May 6, 2026

भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल की जीत से पहले पंजाब में पत्ते बिछाने शुरू कर दिए थे। उसने आम आदमी पार्टी के छह राज्यसभा सांसदों को अपनी पार्टी में शामिल कराया। इनमें से चार सांसदों का कोई खास मतलब नहीं है लेकिन दो सांसद राघव चड्ढा और संदीप पाठक का मतलब है। संदीप पाठक…

तृणमूल नेताओं की मुश्किलें बढ़ेंगी

May 6, 2026

ऐसा लग रहा है कि 15 साल के ममता बनर्जी के राज में तृणमूल कांग्रेस के जितने नेताओं के ऊपर आरोप लगे थे उन सबके ऊपर तलवार लटक रही है। पुराने मामले जो चल रहे हैं वो चलते रहेंगे। जैसे शिक्षक भर्ती घोटाला या चिटफंड घोटाला या कोयले की तस्करी आदि के मामले हैं। इनमें…

दो केंद्रीय मंत्री चुनाव लड़े और हार गए

May 6, 2026

सोचें, केंद्रीय मंत्री का कद और पद कितना बड़ा होता है लेकिन कांग्रेस केंद्रीय मंत्रियों को चुनाव में उतारती रहती है और वे हारते रहते हैं। मध्य प्रदेश के पिछले चुनाव में कई केंद्रीय मंत्री चुनाव में उतरे थे, जिनमें से एक फग्गन सिंह कुलस्ते चुनाव हार गए थे। उससे पहले केंद्रीय मंत्री रहते निशीथ…

डॉलर लाने की चिंता

May 6, 2026

चुनौती गंभीर हो रही हो, तो आरबीआई के लिए डॉलर की आवक बढ़ाने के उपायों पर विचार करना लाजिमी है। मगर ऐसे उपाय मरहम-पट्टी ही साबित होंगे। वजह भारत के प्रति विदेशी निवेशकों का उदासीन हो जाना है। रुपये के गिरने का सोमवार को नया रिकॉर्ड बना। पहली बार बाजार 95।9 रुपये प्रति डॉलर के…

logo