मतदान से पहले असहाय ममता

Categorized as राजनीति

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पूरी तरह से असहाय दिख रही हैं। इस बार उन्होंने चुनाव प्रचार लड़ने भिड़ने के अंदाज में शुरू किया था। पिछले चुनाव यानी 2021 का विधानसभा चुनाव उन्होंने निरीहता के अंदाज में लड़ा था। अपने को दीदी की बजाय बंगाल की बेटी की तरह प्रोजेक्ट किया और लगभग पूरा चुनाव व्हील चेयर पर बैठ कर लड़ा। इस बार उनके तेवर अलग थे। उन्होंने पहले दिन से टकराव का तरीका चुना। ममता ने चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोला और एसआईआर के खिलाफ पांच दिन तक धरना दिया। इसके बाद ईडी ने उनकी पार्टी के लिए चुनाव प्रबंधन का काम देख रही संस्था आईपैक के ऊपर छापा मारा तो ममता बनर्जी मौके पर पहुंच गई थीं। ईडी का आरोप है कि उन्होंने सरकारी काम में बाधा डाला और जब्त की गई चीजें छीन कर ले गईं। इससे जुड़ा मुकदमा अभी सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। इसके बाद वे चुनाव आयोग से जुड़े मामले में एक वकील की तरह सुप्रीम कोर्ट में पेश हुईं और अपनी याचिका पर खुद पैरवी की।

ममता का रुख अब भी आक्रामकता वाला है लेकिन पिछले एक महीने में उनके ऊपर इतनी तरह के हमले हुए हैं और ऐसी ऐसी कार्रवाई हुई है, जिससे वे पूरी तरह से असहाय दिख रही हैं। ऐसा लग रहा है कि देश की सारी एजेंसियां उनके खिलाफ कार्रवाई कर रही हैं। ईडी ने आईपैक पर आठ जनवरी को छापा मारा था। लेकिन उसके बाद वह चुप नहीं बैठी। उसने फिर कार्रवाई की। दोबारा छापा मारा और कंपनी के एक निदेशक विनेश चंदेल को गिरफ्तार कर लिया। उसके बाद कंपनी के दूसरे निदेशक रिषीराज सिंह को पूछताछ के लिए बुलाया। इसके बाद खबर आई कि आईपैक ने काम करना बंद कर दिया है। सोचें, बीच चुनाव में अगर यह खबर आती है कि तृणमूल कांग्रेस का चुनाव प्रबंधन करने वाली कंपनी ने काम करना बंद कर दिया है तो उसका कार्यकर्ताओं और नेताओं के मनोबल पर क्या असर होगा।

इतना ही नहीं ईडी ने ममता बनर्जी की पार्टी के कई नेताओं और यहां तक कि उम्मीदवारों के यहां भी छापा मारा। चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों को पूछताछ के लिए नोटिस भेजा गया। हद तो तब हो गई, जब मतदान से तीन दिन पहले ममता बनर्जी के सुरक्षा अधिकारी शांतनु सिन्हा बिस्वास के यहां ईडी ने छापा मारा। उनके खिलाफ कार्रवाई चुनाव से जुड़े किसी मामले में नहीं है, बल्कि जमीन कब्जा करने से जुड़े किसी मामले में हुई है। असल में भाजपा यह धारणा बनवा रही है कि ममता कमजोर हुई हैं और भाजपा इस बार हर उपाय करके उन पर भारी पड़ रही है।


Previous News Next News

More News

मतदान से पहले असहाय ममता

April 21, 2026

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पूरी तरह से असहाय दिख रही हैं। इस बार उन्होंने चुनाव प्रचार लड़ने भिड़ने के अंदाज में शुरू किया था। पिछले चुनाव यानी 2021 का विधानसभा चुनाव उन्होंने निरीहता के अंदाज में लड़ा था। अपने को दीदी की बजाय बंगाल की बेटी की तरह प्रोजेक्ट किया और लगभग पूरा…

यूपी का मंत्रिमंडल विस्तार कब होगा?

April 21, 2026

यह ऐसा प्रश्न बन गया है, जिसका कोई जवाब नहीं दे पा रहा है। 2022 में सरकार बनने के बाद से पिछले चार साल में योगी आदित्यनाथ के मंत्रिमंडल में कोई बदलाव नहीं हुआ है। एकाध वैकेंसी होने पर मंत्री बनाना या एकाध विभाग बदलना अलग बात है। लेकिन चार साल से ज्यादा समय तक…

अनिल अग्रवाल निशाने पर, बचाव में उतरे जिंदल, बेदी

April 21, 2026

वेदांता समूह के मालिक अनिल अग्रवाल निशाने पर हैं। असल में अब तक मोदी भक्ति करते रहे अनिल अग्रवाल ने पिछले दिनों सरकार की दुखती नस पर हाथ रख दिया था। उन्होंने जेपी समूह का अधिग्रहण अडानी समूह द्वारा किए जाने को चुनौती दी थी। वे अदालत पहुंचे थे, जहां उन्होंने कहा कि उनकी बोली…

महिलाओं के मतदान व्यवहार पर असर नहीं

April 21, 2026

महिला आरक्षण के लिए बनाए गए नारी शक्ति वंदन कानून में बदलाव नहीं हो सका और इससे महिलाओं को विधानसभाओं व लोकसभा में आरक्षण मिलने का रास्ता रूक गया, इससे महिलाएं बहुत नाराज होंगी ऐसा कहने और मानने वाले लोग सिर्फ भाजपा के नेता हैं। बाकी किसी को इस तरह की धारणा पर शायद ही…

सिकुड़ता हुआ श्रम बाजार

April 21, 2026

पीएलएफएस के मुताबिक श्रमिकों को कोरोना काल के पहले एक हफ्ते में जितने घंटे मिलते थे, आज उससे कम मिल रहे हैं। ऐसे में श्रमिकों की सौदेबाजी की क्षमता गिरी है और कार्य-स्थितियां बिगड़ी हैं। नतीजा बढ़ती श्रमिक अशांति है। भारत में 2025 में श्रमिकों के लिए कम कामकाजी घंटे उपलब्ध हुए। यह तथ्य ताजा…

logo