कमलनाथ, आनंद शर्मा और थरूर क्या चाहते हैं?

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कांग्रेस के तीन बड़े नेताओं ने पश्चिम एशिया में चल रही जंग के बीच सरकार का समर्थन किया है। एक तरफ राहुल गांधी लगातार इस जंग में भारत की भूमिका और भारत पर हो रहे असर को सवाल उठा रहे हैं। लेकिन मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और दो पूर्व केंद्रीय मंत्रियों आनंद शर्मा और शशि थरूर ने सरकार का समर्थन किया है। तीनों ने कहा है कि सरकार ने कूटनीतिक मामले में अच्छा स्टैंड लिया। साथ ही यह भी कहा है कि देश में एलपीजी सिलेंडर की कोई कमी नहीं है। इनमें से दो नेता आनंद शर्मा और शशि थरूर कांग्रेस के उस जी 23 ग्रुप के सदस्य थे, जिसने सोनिया गांधी को कांग्रेस नेतृत्व के बारे में चिट्ठी लिखी थी। थरूर लगातार पार्टी लाइन से अलग हट कर बयानबाजी करते रहे हैं। लेकिन केरल चुनाव शुरू होने के बाद वे शांत होकर बैठ गए थे। अब वे एक बार फिर मुखर हुए हैं। सवाल है कि ये तीनों नेता क्या चाहते हैं?

यह लाख टके का सवाल है। जहां तक शशि थरूर का सवाल है तो वे केरल का मुख्यमंत्री बनना चाहते थे। वे चाहते थे कि कांग्रेस उनको मुख्यमंत्री पद का दावेदार बना कर चुनाव लड़े। कांग्रेस इसके लिए तैयार नहीं हुई। सो, वे अभी से पोजिशनिंग कर रहे हैं। चुनाव नतीजे के बाद वे कोई रास्ता चुनेंगे। केरल में मुख्यमंत्री नहीं बन पाए तो क्या पता केंद्र में मंत्री बनने के बारे में सोचें। लेकिन बाकी दोनों नेता कमलनाथ और आनंद शर्मा का मामला दूसरा है। असल में आनंद शर्मा पिछले महीने हुए राज्यसभा चुनाव में हिमाचल प्रदेश से दावेदार थे। उनको लग रहा था कि राज्य की एक सीट है और किसी ब्राह्मण को मिलनी है तो वे स्वाभाविक दावेदार हैं। आखिर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने ब्राह्मण नेता अनुराग शर्मा को उम्मीदवार बनाया। हिमाचल से बात नहीं बनी तो उनको लग रहा था कि हरियाणा से भूपेंद्र सिंह हुड्डा उनको राज्यसभा भेज देंगे। ध्यान रहे हुड्डा और आनंद शर्मा में अच्छी दोस्ती है और हुड्डा भी जी 23 के सदस्यों में शामिल थे। लेकिन वहां से राहुल गांधी ने करमबीर बौद्ध को उम्मीदवार बना दिया। सो, आनंद शर्मा नाराज हैं। हलांकि कांग्रेस उनकी ज्यादा परवाह नहीं कर रही है। वे कांग्रेस के लिए एक तरह से अप्रासंगिक हो गए हैं।

जहां तक कमलनाथ की बात है तो उनकी उम्मीदें अभी कायम हैं। जून में मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव होने वाले हैं, जिसमें से एक सीट कांग्रेस पार्टी को मिलेगी। कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह जून में रिटायर हो रहे हैं। उन्होंने कहा है कि वे अब राज्यसभा नहीं जाना चाहते। हालांकि यह कहने की बात होती है। बताया जा रहा है कि कमलनाथ अपने लिए या बेटे नकुलनाथ के लिए राज्यसभा की सीट चाहते हैं। कांग्रेस की ओर से कई और दावेदार हैं। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव और मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी दोनों को दावेदार माना जा रहा है। इनके अलावा तेलंगाना की प्रभारी मीनाक्षी नटराजन भी दावेदार हैं। पहले कहा जा रहा था कि मीनाक्षी नटराजन को तेलंगाना से ही राज्यसभा भेजा जा सकता है। लेकिन पहले ही एक बाहरी नेता अभिषेक सिंघवी वहां से राज्यसभा सदस्य थे और इस बार भी उनको रिपीट किया गया है। इसलिए कहा जा रहा है कि राहुल गांधी मध्य प्रदेश से मीनाक्षी नटराजन को भेजेंगे। अगर कमलनाथ या उनके बेटे को मौका नहीं मिलता है तो वे पाला बदलने के बारे में सोच सकते हैं। हालांकि कमलनाथ को इंदिरा गांधी का तीसरा बेटा माना जाता था। सो, उनके लिए फैसला मुश्किल होगा। पर नकुलनाथ के लिए फैसला मुश्किल नहीं होगा।


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