अय्यर किस बात का बदला ले रहे हैं?

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ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर अपनी पुरानी पार्टी से बदला ले रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस का ज्यादा से ज्यादा नुकसान करने का फैसला किया है। हालांकि यह नहीं माना जा सकता है कि किसी ने उनको ठेका दिया, जैसा कि कई कांग्रेस नेता भी उनको ‘सुपारी किलर’ कह रहे हैं। वे यह भी कह रहे हैं कि किसी के इशारे पर अय्यर कांग्रेस और राहुल गांधी को निशाना बना रहे हैं। लेकिन असल में अय्यर और कांग्रेस का साथ कुछ इसी तरह का रहा है। 1997 में जब ममता बनर्जी ने कांग्रेस छोड़ कर तृणमूल कांग्रेस बनाई तो मणिशंकर अय्यर भी कांग्रेस छोड़ कर उनके साथ चले गए थे। हालांकि वे जल्दी ही कांग्रेस में वापस लौट आए और कहा कि ममता की पार्टी बंगालियों की पार्टी है। उस समय अय्यर लोकसभा का चुनाव हारे हुए थे। बाद में अय्यर 2004 में कांग्रेस के नेतृत्व में सरकार बनी तो अय्यर मंत्री हुए। हालांकि वहां भी जल्दी ही पेट्रोलियम से हटा कऱ उनको पंचायती राज में भेज दिया गया।

उनको इस बात की शिकायत हो सकती है कि 2009 में लोकसभा का चुनाव हारने के बाद कांग्रेस ने कभी उनको महत्व नहीं दिया। सोनिया गांधी ने उनका पुनर्वास नहीं किया, जबकि 2009 में कांग्रेस की सरकार बनी औऱ कई राज्यों में कांग्रेस की सरकार थी। सोनिया और राहुल गांधी चाहते तो उनको कहीं से राज्यसभा भेजा जा सकता था। क्या अब जाकर अय्यर पुरानी बातों का बदला रहे हैं। कांग्रेस के कई नेताओं का कहना है कि अय्यर अपने लिए राज्यसभा की सीट चाहते हैं। लेकिन उनको भी पता है कि 85 साल की उम्र में कोई भी पार्टी उनको राज्यसभा नहीं भेज रही है। फिर भी वे लगातार अलग अलग विपक्षी नेताओं की तारीफ कर रहे हैं। इस तारीफ से उनको कुछ नहीं मिलने वाला है। लेकिन वे कांग्रेस का नुकसान जरूर कर सकते हैं। हो सकता है कि यही सोच रहे हों कि क्या पता इसी बहाने सोनिया गांधी बुला कर बात करें। लेकिन ऐसा लग नहीं रहा है।


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