केजरीवाल जान बूझकर परदे के पीछे

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दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल लापता हैं। वे अगर सांसद या विधायक होते तो दिल्ली में उनके लापता होने के पोस्टर लगते। लेकिन वे न तो दिल्ली संगठन से जुड़े हैं और न दिल्ली में विधायक या सांसद हैं इसलिए भी कोई उनको खोज नहीं रहा है। वे ज्यादा समय पंजाब में रहते हैं। लेकिन वहां भी उनका दिखना कम हो गया है। शुरुआती दिनों में वे पंजाब में बहुत सक्रिय दिखे। हर जगह वे मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ दिखाई देते थे। मुख्यमंत्री उनके असिस्टेंट की तरह उनके साथ चलते थे। लेकिन अब केजरीवाल पूरी तरह से परदे के पीछे हो गए हैं। उनके साथ साथ पार्टी के नंबर को मनीष सिसोदिया भी परदे के पीछे हो गए हैं। आम आदमी पार्टी के जानकार सूत्रों का कहना है कि केजरीवाल ने जान बूझकर अपने को परदे के पीछे किया है।

अभी केजरीवाल का एकसूत्री एजेंडा अगले साल के चुनाव में पंजाब में वापसी करना है और गोवा में पोजिशन मजबूत करना है। हाल में उन्होंने गोवा के प्रदेश अध्यक्ष अमित पालेकर को हटाया, जिसके बाद उन्होंने केजरीवाल पर कई तरह के आरोप लगाए। अगले साल के अंत में गुजरात का भी चुनाव है। सो, केजरीवाल के असर वाले चार राज्यों में से तीन में अगले साल ही चुनाव हैं। इसलिए भी कहा जा रहा है कि वे दिल्ली की राजनीति से दूर हुए हैं। उनके साथ एनजीओ के दिन से काम करने वाले एक नेता का कहना है कि केजरीवाल ने दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार के तीन महीने के कामकाज के बाद ही समझ लिया था कि उनको यहां कुछ करने की जरुरत नहीं है। उन्होंने अपने लोगों से कहा था कि खुद भाजपा की सरकार ही ऐसा कर देगी कि फिर कई चुनाव तक लोग उसे नहीं चुनेंगे। वैसे भी दिल्ली का विधानसभा चुनाव 2030 में होना है। उससे पहले लोकसभा का चुनाव भी है।

आम आदमी पार्टी के जानकार नेताओं का कहना है कि केजरीवाल ने दिल्ली में नया नेतृत्व तैयार करने की भी संदेश दिया है। केजरीवाल और सिसोदिया तो दिल्ली से बाहर निकले ही हैं उन्होंने पार्टी के दूसरे महत्वपूर्ण नेताओं को भी दिल्ली से बाहर की ड्यूटी लगा दी है। यहां तक कि मुख्यमंत्री रहीं और अभी विधानसभा में विपक्ष की नेता की भूमिका निभा रहीं आतिशी को भी दिल्ली से बाहर भेजा गया है। उनको केजरीवाल ने गोवा का प्रभारी बनाया है। पहले पंकज गुप्ता गोवा के प्रभारी थे। उनकी जगह आतिशी को भेजा गया है। अगले साल के विधानसभा चुनाव की तैयारी वे कर रही हैं। इसी तरह पार्टी के सबसे बड़े नेताओं में से एक गोपाल राय को गुजरात का प्रभारी बनाया गया है, जहां अगले साल के अंत में चुनाव हैं। पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह उत्तर प्रदेश में ज्यादा समय दे रहे हैं। राघव चड्ढा पंजाब से राज्यसभा सांसद जरूर हैं लेकिन वे न तो पंजाब में समय दे रहे हैं और न दिल्ली में। संसद चलती है तो वे दिल्ली में रहते हैं अन्य़था अपनी फिल्मस्टार पत्नी के साथ मुंबई में रहते हैं। सो, केजरीवाल ने पूरी दिल्ली सौरभ भारद्वाज के हवाले छोड़ी है। वे दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष हैं और लगातार जमीन पर सक्रिय हैं। यह भी कहा जा रहा है कि केजरीवाल ने सौरभ भारद्वाज को नए लोगों की टीम बना कर काम करने की छूट दी है। वैसे यह भी कहा जा रहा है कि दिल्ली की पूरी टीम पंजाब में लगेगी।


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