सदानंदन मास्टर की पीड़ा और वीएस अच्युतानंदन

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संसद के बजट सत्र के दौरान सोमवार, दो फरवरी को एक गजब का दृश्य राज्यसभा में देखने को मिला। भारतीय जनता पार्टी के नेता और राज्यसभा के मनोनीत सांसद सदानंदन ने सदन की कार्यवाही के दौरान अपने दोनों नकली पैर निकाल कर अपने सामने टेबल पर रख दी। उन्होंने अपनी पीड़ा व्यक्ति की थी। इसे लेकर काफी हंगामा हुआ। सीपीएम के सांसद जॉन ब्रिटास ने इस पर आपत्ति की और आसन की ओर से सदानंदन मास्टर को कहा गया कि वे पैर नीचे रखें। हालांकि सभापति सीपी राधाकृष्णन ने इस मौके का फायदा उठाते हुए विपक्ष को यह भी कह दिया कि वे भी सदन में प्लेकार्ड लाते समय नियमों का ध्यान रखें। लेकिन वह अलग मामला है।

असली सवाल सदानंदन मास्टर का है, जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बगैर केरल में भाजपा, आरएसएस और हिंदुत्व की विचारधारा का प्रचार किया। उनके ऊपर जनवरी 1994 में जानलेवा हमला हुआ था। हमला किया था सीपीएम के कार्यकर्ताओं ने। उन्होंने सदानंदन पर हिंदुत्व के प्रचार का आरोप लगाते हुए हमला किया और घर के बाहर खींच कर बड़ी बर्बरता से उनके दोनों पैर काट दिए। उस समय राज्य के मुख्यमंत्री सीपीएम के नेता वीएस अच्युतानंदन थे। भाजपा ने उनके ऊपर बड़ा हमला किया। आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री और उनकी सरकार हमले करा रही है और हिंदुत्व का प्रचार रोक रही है। लेकिन पिछले दिनों उन्हीं वीएस अच्युतानंदन को केंद्र की भाजपा की सरकार की सिफारिश पर दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। सोचें, सदानंदन मास्टर और दूसरे लोग इस बारे में क्या सोच रहे होंगे?


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