एनसीपी नेता नहीं चाहते शरद पवार के साथ जाना

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सुनेत्रा पवार के उप मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद शरद पवार ने जो कहा वह हो गया। उन्होंने कहा था कि अब विलय की बात रूक जाएगी और मामला टल जाएगा। वही हुआ है। एनसीपी के नेताओं ने विलय की बात पर चुप्पी साध ली है। बताया जा रहा है कि जिस तरह से आनन फानन में सुनेत्रा पवार उप मुख्यमंत्री बनीं वैसे ही वे राष्ट्रीय अध्यक्ष बन जाएंगी। यह भी हो सकता है कि बेटे पार्थ पवार को राज्यसभा भेजने के बाद उनको अध्यक्ष बनाया जाए। यह तय है कि इन दोनों में से कोई राष्ट्रीय अध्यक्ष होगा। इसके बाद विलय की बात होगी लेकिन सुनेत्रा की शर्त होगी कि नेतृत्व उनके हाथ में रहे और सुप्रिया सुले उनके नेतृत्व में काम करें। शरद पवार अगर बिना किसी अधिकार के संरक्षक या संयोजक बनना चाहें तो वह बनाया जा सकता है।

विलय की बात रूक जाने का संकेत इससे भी मिलता है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने कहा है कि उनको विलय की बातचीत के बारे में जानकारी नहीं थी। सोचें, क्या ऐसा हो सकता है? शरद पवार कह रहे हैं कि चार महीने से बातचीत चल रही थी और अजित पवार के साथ जितेंद्र पाटिल और शक्तिकांत शिंदे बाद कर रहे थे। सो, निश्चित रूप से फड़नवीस को इसकी जानकारी रही होगी। लेकिन चूंकि अब इस पऱ फिलहाल के लिए पूर्णविराम लगाना है इसलिए उन्होंने वही बात कही, जो सुनेत्रा पवार सुनना चाहती हैं। असल में अजित पवार के रहते नेतृत्व को लेकर कोई सवाल नहीं था। सुप्रिया भी उनके नेतृत्व में काम कर लेतीं। लेकिन उनके नहीं रहने पर शरद पवार खेमे को एक मौका दिख रहा है पार्टी को फिर से अपने नियंत्रण में लेने का। दूसरी ओर अजित पवार खेमे के प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल या सुनील तटकरे को लग रहा है कि अगर विलय हुआ तो नई पार्टी में उनकी हैसियत कमजोर होगी। उधर सुनेत्रा पवार हमेशा स्वतंत्र राजनीति करना चाहती थीं। तभी बारामती में सुप्रिया सुले से चुनाव हारने के बाद उन्होंने जिद करके राज्यसभा की सीट ली। कुल मिला कर अजित पवार की पार्टी में कोई भी नेता अभी विलय के लिए तैयार नहीं है।


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