जुबिन मामले में राजनीति बंद हो

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असम में विधानसभा का चुनाव होने वाला है और उससे पहले सभी पार्टियों ने सिंगर जुबिन गर्ग की मौत के मामले को राजनीति का हथियार बना दिया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पहले दिन से कहना शुरू कर दिया कि यह सामान्य मौत नहीं है, बल्कि हत्या है और इसके बाद उन्होंने जुबिन को न्याय दिलाने का अभियान शुरू कर दिया। दूसरी ओर कांग्रेस और उसके नेता गौरव गोगोई दावा कर रहे हैं कि सरकार जुबिन को न्याय दिलाने में नाकाम रही है। इस चक्कर में तीन आरोपी जेल में बंद हैं। पिछले हफ्ते उनकी जमानत खारिज हो गई।

दूसरी ओर सिंगापुर में जहां जुबिन की मौत हुई वहां की पुलिस ने अदालत को बताया है कि यह डूबने से हुई सामान्य मौत का मामला है और इसमें कोई साजिश नहीं हुई थी। करीब तीन दर्जन गवाहों के बयान और सबूतों के आधार पर सिंगापुर पुलिस ने कहा कि जुबिन गर्ग नशे में थे और उन्होंने लाइफ जैकेट पहनने से इनकार कर दिया था, जिसकी वजह से वे डूबे और उनकी मौत हो गई। सोचों, जहां घटना हुई वहां की पुलिस से सामान्य मौत मान रही है लेकिन वहां से हजारों किलोमीटर दूर असम में कमर कस कर बैठी है कि यह हत्या है। चुनावी में फायदा लेने के लिए कहीं ऐसा न हो कि काल्पनिक हत्यारों को जेल में ही बंद रखा जाए।


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