गैर हिंदुओं पर पाबंदी कैसे लागू होगी?

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हिंदू तीर्थस्थलों पर गैर हिंदुओं को आने से रोकने की चर्चा अब मुख्यधारा में आ गई है। कुछ समय पहले तक फ्रींज एलीमेंट यानी हाशिए पर के कुछ नेता इसकी चर्चा करते थे और इस पर ध्यान नहीं दिया जाता था। ध्यान रहे कई हिंदू तीर्थ पहले से आइडेंटिफाइड हैं, जहां गैर हिंदू नहीं जा सकते हैं। लेकिन जहां बहुत भीड़ जुटती है और जिनको तीर्थस्थल के साथ साथ पर्यटन स्थल के तौर पर भी विकसित किया गया है वहां इस तरह की बातें नहीं हैं। लेकिन पिछले दिनों कहा गया कि हरिद्वार के कुंभ में गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित किया जाएगा। उसके बाद खबर है कि बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम में भी गैर हिंदुओं को आने से रोकने की व्यवस्थआ की जाएगी।

अब सवाल है कि यह व्यवस्था कैसे लागू होगी? जहां रजिस्ट्रेशन होता है वहां तो ठीक है कि नाम देख कर रोक दिया जाएगा लेकिन जहां जाने के लिए रजिस्ट्रेशन की अनिवार्यता नहीं है वहां क्या होगा? गंगा के किनारे अगर कुंभ लगा है तो वहां कैसे पहचान होगी कि कौन हिंदू है और कौन दूसरे धर्म का? साथ ही यह भी स्पष्ट करना होगा कि गैर हिंदू में सिर्फ मुस्लिम हैं या सिख और ईसाई भी हैं? सोचें, हिंदू धर्म के लोग इतने गर्व से बताते हैं कि एपल कंपनी बनाने वाले स्टीव जॉब्स को कैसे एक हिंदू धर्म गुरू ने आशीर्वाद दिया तो वे इतने बड़े आदमी बने। जेफ बेजॉस को लेकर भी ऐसी बातें कही जाती हैं। और दूसरी ओर गैर हिंदुओं को रोकने का अभियान शुरू हो रहा है! धार्मिक स्थलों का निरादर रोकने के नियम बनने चाहिए और वो नियम हर धर्म के लोगों पर समान रूप से लागू होने चाहिए।


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