शिंदे को बचाए रखना चाहती है भाजपा

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महाराष्ट्र में जब से देवेंद्र फड़नवीस मुख्यमंत्री और एकनाथ शिंदे उनके उप मुख्यमंत्री बने हैं तब से अनगिनत बार यह अटकल सुनने को मिली कि शिंदे की पार्टी टूटेगी। उनके मंत्रियों की अनदेखी किए जाने की खबरें भी कई बार आईं। हर जब ऐसी खबरें आती हैं तो शिंदे दिल्ली भागते हैं और दिल्ली से लौटने के बाद सब ठीक हो जाता है। चर्चा थोड़े दिन के लिए थम जाती है। तभी कहा जाता है कि महाराष्ट्र भाजपा के नेता खास कर फड़नवीस एंड कंपनी शिंदे की पार्टी को निपटाना चाहती है। उनका मानना है कि शिंदे को जो भूमिका निभानी थी वह वे निभा चुके। उनका काम शिव सेना को तोड़ना और उद्धव ठाकरे को कमजोर करना था, जो वो कर चुके। इसलिए अब उनकी उपयोगिता नहीं है। लेकिन ऐसा लग रहा है कि दिल्ली में यानी भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व में उनकी उपयोगिता अभी मानी जा रही है। तभी बार बार उनके अभयदान मिल रहा है।

बृहन्नमुंबई महानगरपालिका यानी बीएमसी के चुनाव में एक बार फिर भाजपा ने उनको जीवनदान दिया है। भाजपा की ने उनकी पार्टी को 90 सीटें दी हैं। बीएमसी की 227 सीटों में से भाजपा खुद 137 सीटों पर लड़ेगी और शिंदे की शिव सेना 90 सीटों पर लड़ेगी। जानकार सूत्रों का कहना है कि बीएमसी का चुनाव आखिरी परीक्षा है। अगर इसमें उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के साथ बनाया गया उनका गठबंधन फेल होता है तो स्थायी रूप से शिव सेना समाप्त होगी। उससे पहले भाजपा के नेता जोखिम नहीं लेना चाहते। तभी शिंदे को बनाए रखा गया और उनको इतना महत्व दिया गया। ध्यान रहे मुंबई महानगर में शिव सेना का बड़ा असर है। जिन इलाकों में शिव सेना का असर है वहां भाजपा उसको मात नहीं दे सकती है। इसलिए भी उसे एकनाथ शिंदे की जरुरत थी।

तभी कहा जा रहा है कि बीएमसी की परीक्षा में निर्णायक रूप से एकनाथ शिंदे की उपयोगिता की भी परीक्षा होने वाली है। उनको जो 90 सीटें मिली हैं उनमें से ज्यादातर ऐसे इलाके हैं, जो पुराने समय से शिव सेना का गढ़ रहे हैं। उन इलाकों में अगर शिंदे की पार्टी के उम्मीदवार इतना वोट लेते हैं कि उद्धव और राज ठाकरे की पार्टी के उम्मीदवार हार जाएं तब भी भाजपा का काम बन जाएगा। शिंदे के लोग जीतें यह ज्यादा अहम नहीं है। ज्यादा अहम यह है कि उद्धव और राज ठाकरे के लोग हारें। बेशक वोट बंटवारे में उन सीटों पर कांग्रेस जीत जाए। हो सकता है कि भाजपा के इस दांव में दोनों ही शिव सेना निपट जाए। भाजपा अपने कोटे की 137 सीटों में से इतनी सीटें जीतने की उम्मीद कर रही है, जिससे वह जोड़ तोड़ करके अपना मेयर बना ले। एक बार भाजपा ने अपनी ट्रिपल इंजन की सरकार बना ली तो फिर वह अपने हिसाब से राजनीति करेगी।


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