बेंगलुरू। थोक में फॉर्म सात भर कर मतदाताओं के नाम कटवाने के मामले में गुरुवार को दिन भर में कर्नाटक में बड़ा सियासी घटनाक्रम चला। राज्य के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार इसे लेकर धरने पर बैठे। उन्होंने प्रदेश चुनाव अधिकारी से इन गड़बड़ियों को रोकने की मांग की। इससे पहले डीके शिवकुमार गुरुवार की सुबह राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी यानी सीईओ के कार्यालय पहुंचे और वहां दफ्तर के बाहर धरने पर बैठे।
डीके शिवकुमार ने कहा कि फॉर्म सात के दुरुपयोग में शामिल लोगों के खिलाफ जब तक रिपोर्ट दर्ज नहीं होगी, तब तक वे वहां से नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि एसआईआर में गड़बड़ियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। बाद में राहुल गांधी ने भी यही मांग की। इससे पहले शिवकुमार ने मीडिया से बात करते हुए कहा था कि 45 लाख से ज्यादा वोटरों के नामों में गड़बड़ियां सामने आई हैं। इसमें भाजपा के लोग शामिल हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारें या उनकी पुलिस चुनाव आयुक्तों पर उनके सरकारी काम को लेकर सीधे केस दर्ज नहीं कर सकती हैं। इसलिए वे आयोग से ही मुकदमे और जांच की मांग कर रहे हैं।
गौरतलब है कि कर्नाटक में आठ अगस्त 2026 तक एसआईआर का पहला चरण हुआ। इससे पहले राज्य में 5.54 करोड़ मतदाता थे। एसआईआर के दौरान 1.08 करोड़ नाम हटाए गए, जिससे कुल मतदाताओं की संख्या घटकर 4.46 करोड़ रह गई। शिवकुमार ने बताया कि विजयपुरा, भालकी, बेलगावी, मैसूरु, मुदिगेरे और बेंगलुरु समेत कई विधानसभा क्षेत्रों में लोगों को पहले से भरे हुए फॉर्म सात दिए गए। इन फॉर्म में वोटरों के नाम, पते और इपिक नंबर पहले से दर्ज थे।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि 70 फीसदी से ज्यादा बूथों में बीजेपी से जुड़े नेताओं ने फॉर्म सात लिए हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ लोगों ने दर्जनों और कुछ ने सैकड़ों आवेदन जमा किए। शिवकुमार ने एक साथ 84, 92, 241 और 423 फॉर्म जमा करने वाले लोगों के उदाहरण दिए। उन्होंने दो पन्नों की एक चिट्ठी मुख्य चुनाव अधिकारी को लिखी है, जिसमें क्षेत्रवार नाम काटे जाने की जानकारी दी है।
