नीट पीजी के कटऑफ पर सुनवाई

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की दलीलों पर ध्यान नहीं दिया है। केंद्र सरकार ने कहा है कि मेडिकल में पीजी की डिग्री हासिल करने के लिए दाखिला परीक्षा यानी नीट पीजी की परीक्षा में कटऑफ बहुत कम कर देने से गुणवत्ता पर असर नहीं पड़ेगा। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस पर ध्यान नहीं देते हुए कहा कि वह इस बात की जांच करेगा कि नीट पीजी 2025-26 के लिए क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल में भारी कमी करने से पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन की गुणवत्ता पर असर पड़ेगा या नहीं।

सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि हालांकि केंद्र सरकार का कहना सही है कि नीट पीजी एंट्री लेवल एमबीबीएस परीक्षा नहीं है और उम्मीदवार पहले से ही क्वालिफाइड डॉक्टर हैं, फिर भी कोर्ट को कट ऑफ को बहुत कम करने के असर पर विचार करना होगा। गौरतलब है कि नीट पीजी की परीक्षा के नतीजों के बाद जब मेडिकल में पीजी की बहुत सीटें खाली रह गईं तो दाखिले के लिए कटऑफ को माइनस 40 अंक तक घटा दिया गया। जीरो से उससे भी कम अंक लाने वालों को पीजी कोर्स में दाखिला मिला। चार साल से ज्यादा एमबीबीएस की पढ़ाई करने के बाद भी अगर डॉक्टर लोग जीरो अंक ला रहे हैं तो उनकी पढ़ाई पर बहुत गंभीर सवाल उठते हैं।

बहरहाल, जस्टिस नरसिम्हा ने कहा, शिक्षा की गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ना हमारे लिए सबसे ज्यादा चिंता की बात है। आपको हमें यह समझाना होगा कि कटऑफ में इतनी भारी कमी, इसे लगभग जीरो और न के बराबर कर देना, हालांकि आपका यह कहना सही है कि यह एमबीबीएस में एंट्री जैसा नहीं है, पोस्ट ग्रेजुएशन है। यह एक अलग लेवल है क्योंकि जो लोग अप्लाई करते हैं वे पहले से ही डॉक्टर हैं। लेकिन फिर प्रतियोगिता के मामले में हमें सोचना होगा’।

अपने फैसले का बचाव करते हुए, केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि नीट पीजी में दाखिले के लिए परीक्षा में मिलने वाले अंत प्रतियोगी की योग्यता का प्रमाण नहीं हैं। सरकार ने अपने हलफनामे में कहा कि नीट पीजी का अंक न्यूनतम योग्यता को प्रमाणित नहीं करता है। सरकार ने हलफनामे में कहा कि किसी प्रतियोगी की योग्यता का निर्धारण एमबीबीएस में दाखिले के समय होता है। केंद्र सरकार ने मेडिकल के पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स में दाखिले के लए कटऑफ को बहुत कम करने या जीरो से कम करने के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि इससे इससे मरीजों की सुरक्षा को लेकर कोई चिंता पैदा नहीं होती है।


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