38 देशों के साथ एफटीए की बातचीत- मोदी

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दावा किया कि भारत की आर्थिक ताकत बढ़ी है और उसकी नीतियां स्थिर हुई हैं, जिसकी वजह से दुनिया के देशों के साथ अच्छी व्यापार संधि हो रही है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत दुनिया के 38 देशों के साथ मुक्त व्यापार संधि की बातचीत कर रहा है। उन्होंने कहा कि इससे हर सेक्टर में भारत का व्यापार बढ़ेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने इस साल के बजट को विकसित भारत के लक्ष्य वाला बताया।

न्यूज एजेंसी पीटीआई को दिए इंटरव्यू में प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को कहा, ‘इस साल का बजट देश के विकसित भारत बनने के लक्ष्य को दिखाता है’। उन्होंने कहा, “यह बजट किसी मजबूरी में लिया गया फैसला या ‘अभी नहीं तो कभी नहीं’ जैसा पल नहीं, बल्कि ‘हम तैयार हैं’ वाला पल है, जो तैयारी और आत्मविश्वास से पैदा हुआ है”। ‘यह बजट सिर्फ 2026 का नहीं, बल्कि 21वीं सदी के दूसरे चरण की शुरुआत का बजट है। जैसे 1920 के दशक के फैसलों ने 1947 की आजादी की नींव रखी, वैसे ही आज के फैसले 2047 के विकसित भारत की नींव रखेंगे’।

उन्होंने कहा, ‘आर्थिक ताकत और स्थिर नीतियों से भारत बेहतर शर्तों पर समझौते कर पा रहा है। भारत 38 देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर काम कर रहा है। एफटीए का मकसद टेक्सटाइल, लेदर और अन्य सेक्टर्स के एमएसएमई को नए बाजार और निर्यात के अवसर देना है’।अपने लंबे इंटरव्यू में मोदी ने यूपीए सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि ‘यूपीए राज में बातचीत शुरू होती थी और फिर टूट जाती थी। लंबी बातचीत के बावजूद कोई खास नतीजा नहीं निकला’।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘सरकार देश की डिफेंस फोर्सेज को मजबूत बनाने के लिए जो भी जरूरी होगा, वह करेगी। मौजूदा हालात को देखते हुए रक्षा क्षेत्र का आधुनिकीकरण सरकार की जिम्मेदारी है। भारत को हर समय मजबूत और तैयार रहना होगा, और हम यही कर रहे हैं। सरकार अपने सैनिकों की भलाई को लेकर बहुत सेंसिटिव है’। मोदी ने कहा, ‘सुधार सरकार का कमिटमेंट है, जिसे उसने पूरी तरह से दिखाया है। आर्थिक बदलाव के अगले फेज के लिए प्राइवेट सेक्टर बहुत जरूरी है। प्राइवेट सेक्टर को मार्जिन बचाने पर कम ध्यान देना चाहिए और आरएंडडी सप्लाई चेन, क्वालिटी में तेज़ी से इन्वेस्ट करना चाहिए’।

भारत में तकनीक और डिजिटल लेन देन की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘भारत दुनिया में एक डिजिटल लीडर है, जो यूपीआई प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों के लेन-देन के तरीके में बड़े सुधारों से मुमकिन हुआ है। डेटा सेंटर हमारे युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर जॉब क्रिएटर होंगे’।


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