गणतंत्र दिवस परेड: सेना ने किया ‘बैटल एरे’ फॉर्मेट का प्रदर्शन

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गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार भारतीय सेना ने ‘बैटल एरे’ फॉर्मेट का प्रदर्शन किया। ‘बैटल एरे’ यानी रणभूमि व्यूह रचना। इसके माध्यम से दिखाया गया कि कैसे जंग के समय सेना आगे बढ़ती है, हमला कैसे किया जाता है और कैसे दुश्मन को जवाब देते हैं। 

कर्तव्य पथ पर यह सब कुछ एक ही जगह देखने को मिला। यहां ऑपरेशन ‘सिंदूर’ की झलक भी दिखाई दी। यह पूरा प्रदर्शन ऑपरेशन ‘सिंदूर’ की सफलता को भी एक गर्व भरा सलाम था। वहीं सेना के खास टैब्लो ने एक इंटीग्रेटेड ऑपरेशंस सेंटर को दिखाया। यहां से पूरी जंग की योजना बनती है। इसमें दिखाया गया कि कैसे रियल-टाइम में टारगेट तय होते हैं, हमला होता है और ‘सुदर्शन चक्र’ जैसी वायु रक्षा से देश की सुरक्षा होती है। वहीं इसमें हवाई घटक भी शामिल रहे।

रेकी एलिमेंट में 61 कैवलरी एक्टिव कॉम्बैट यूनिफॉर्म में रही। इसके बाद हाई मोबिलिटी रिकोनिसेंस व्हीकल था, जो भारत का पहला स्वदेशी रूप से डिजाइन किया गया आर्मर्ड लाइट स्पेशलिस्ट व्हीकल है। हवाई सहायता के रूप में स्वदेशी ध्रुव एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर और इसका आर्म्ड वर्जन रुद्र प्रहार फॉर्मेशन था। यह युद्धक्षेत्र में निर्णायक पहल का प्रदर्शन करता है। 

इसके बाद कॉम्बैट एलिमेंट्स यानी युद्ध में अग्रणी भूमिका निभाने वाले टैंक आए। इनमें टी-90 भीष्म और मेन बैटल टैंक अर्जुन सलामी मंच के सामने से गुजरे। वहीं अपाचे एएच-64 ई और प्रचंड लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर से इन्हें हवाई सहायता मिली। अन्य मैकेनाइज्ड कॉलम में बीएमपी-2 इन्फेंट्री कॉम्बैट व्हीकल, साथ में नाग मिसाइल सिस्टम (ट्रैक्ड) एमके-2 शामिल रही।

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अब तक परेड में सैन्य मार्चिंग टुकड़ियां और हथियार अलग-अलग नजर आते रहे हैं। हालांकि इस बार जंग के असली क्रम जैसी तैयारी देखने को मिली। यानी दुश्मन पर नजर रखने वाले सिस्टम, टैंक और पैदल सेना, उसके साथ ही तोपखाना, मिसाइलें, हेलीकॉप्टर और अंत में सप्लाई व सुरक्षा व्यवस्था। इससे साफ दिखा कि भारतीय सेना कितनी तैयार, मजबूत और फुर्तीली है। 

यहां सेना द्वारा हाई-टेक और स्वदेशी ताकत का प्रदर्शन किया गया। इसके बाद स्पेशल फोर्सेज की टुकड़ी कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ी। इस टुकड़ी में अजयकेतु ऑल-टेरेन व्हीकल, रणध्वज रग्ड टेरेन टैक्टिकल ट्रांसपोर्ट सिस्टम और धवंशक लाइट स्ट्राइक व्हीकल शामिल थे।

इनके बाद वाहनों पर लगे रोबोटिक डॉग, मानवरहित ग्राउंड व्हीकल और चार ऑटोनॉमस मानवरहित ग्राउंड व्हीकल (निग्रह, भैरव, भुविरक्षा और कृष्णा) नजर आए। कॉम्बैट सपोर्ट एलिमेंट में भारत की नई पीढ़ी के मानवरहित वॉरहेड हथियार शामिल थे। उन्हें शक्तिबाण और दिव्यास्त्र के जरिए दिखाया गया, जो खास हाई मोबिलिटी व्हीकल्स पर लगे हुए थे। 

अत्याधुनिक तकनीकों से लैस, ये एक साथ झुंड में ड्रोन, टेथर्ड ड्रोन सिस्टम और स्वदेशी रूप से विकसित टैक्टिकल हाइब्रिड यूएवी जोल्ट के जरिए एडवांस्ड सर्विलांस दिखाते हैं। इनका इस्तेमाल तोपखाने की फायरिंग को निर्दिष्ट करने के लिए किया जाता है।

बैटल एरे में यह भी दिखाया गया कि आज की भारतीय सेना सिर्फ बंदूक और टैंक तक सीमित नहीं है। अब जंग डेटा, ड्रोन और टेक्नोलॉजी से लड़ी जाती है। सेना ने दिखाया कि कैसे वह दूर बैठकर भी दुश्मन पर नजर रखती है, सही वक्त पर फैसला लेती है और फिर सटीक हमला करती है। खास बात यह है कि यह हमला पूरी तरह स्वदेशी हथियारों और सिस्टम के दम पर किया जाता है। 

इस बार परेड में कई नए यूनिट और हथियार पहली बार नजर आए, जैसे कि पहली बार भैरव बटालियन, शक्तिबाण रेजिमेंट और दिव्यास्त्र बैटरी परेड में शामिल हुए। 155 मिमी एटीएजीएस तोप, लंबी दूरी तक मार करने वाला यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम, ड्रोन, रोबोटिक डॉग, बिना चालक वाले वाहन और लुटेरिंग म्यूनिशन भी पहली बार देश की जनता के सामने आए।

Pic Credit : ANI


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