गणतंत्र दिवस पर दिखी स्वदेशी सैन्य शक्ति

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गणतंत्र दिवस समारोह में देश की मजबूत होती स्वदेशी सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता व जन भागीदारी का अदभुत संगम देखने को मिला। कर्तव्य पथ पर शानदार परेड आयोजित की गई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गणतंत्र दिवस समारोह का नेतृत्व किया। यूरोपीय यूनियन के दो बड़े नेता एंटोनियो कोस्टा और उर्सुला वॉन डर लेयेन मुख्य अतिथि रहे। 

इस साल के गणतंत्र दिवस समारोह में ‘वंदे मातरम्’ के 150 साल, देश की तरक्की, स्वदेशी सैन्य उपकरण, सेना की ताकत, भारत की संस्कृति और आम लोगों की भागीदारी सब कुछ एक साथ देखने को मिला। जहां एक ओर सेना ने गणतंत्र दिवस परेड में स्वदेशी रक्षा प्रणालियां प्रदर्शित की, वहीं दूसरी ओर 10 हजार से ज्यादा विशेष अतिथियों की मौजूदगी ने देश के विभिन्न वर्गों का प्रतिनिधित्व किया। इस वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल हुई झांकियों की थीम ‘स्वतंत्रता का मंत्र: वंदे मातरम्’ तथा ‘समृद्धि का मंत्र: आत्मनिर्भर भारत’ रही।

कर्तव्य पथ पर समारोह की शुरुआत 100 कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुति से हुई। इसमें अलग-अलग राज्यों की झलक दिखी। वहीं आसमान से चार एमआई-17 हेलीकॉप्टर्स ने फूल बरसाए। परेड में भारतीय सेना का युद्ध वाला रूप खास तौर पर दिखाया गया। यहां कर्तव्य पथ पर परेड में स्वदेशी टैंक, बख्तरबंद गाड़ियां, मिसाइल सिस्टम, ड्रोन, रोबोटिक डॉग्स नजर आए। इसके अलावा टी-90 भीष्म और अर्जुन टैंक, ब्रह्मोस मिसाइल, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम, ध्रुव और प्रचंड हेलीकॉप्टर व स्पेशल फोर्सेज की मौजूदगी ने भी लोगों को रोमांचित किया।

एक खास झांकी में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ दिखाया गया। इसके माध्यम से बताया गया कि कैसे सेना, नौसेना और वायुसेना मिलकर दुश्मन को जवाब देती हैं। भारतीय नौसेना की झांकी में पुराने जहाजों से लेकर आधुनिक एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत तक की कहानी दिखाई गई। वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने आसमान में शानदार फ्लाई-पास्ट किया। तटरक्षक बल की महिला टुकड़ी भी परेड का हिस्सा बनी। कर्तव्य पथ पर देश के 17 विभिन्न राज्यों और 13 मंत्रालयों की कुल 30 झांकियां निकाली गईं।

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इन झांकियों में संस्कृति, आत्मनिर्भर भारत, कृषि, तकनीक और आजादी की कहानी दर्शायी गई। कई झांकियों के माध्यम से राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया गया। साथ ही आत्मनिर्भरता के आधार पर देश की प्रगति, सांस्कृतिक विविधता, विरासत, नवाचार और विकास यात्रा को जीवंत रूप में प्रदर्शित किया गया। गणतंत्र दिवस समारोह में इस साल करीब 10,000 खास मेहमान भी आमंत्रित थे। ये मेहमान किसान, वैज्ञानिक, स्टार्ट-अप करने वाले युवा, खिलाड़ी, महिला समूह, आदिवासी प्रतिनिधि और समाज के अलग-अलग वर्गों के लोग थे।

इनमें गगनयान, चंद्रयान जैसे इसरो अभियानों से जुड़े उत्कृष्ट वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञ, डीप ओशन मिशन तथा समस्थानिक अनुसंधान से जुड़े वैज्ञानिक, अटल टिंकरिंग लैब्स के उत्कृष्ट विद्यार्थी, किसान व ‘मन की बात’ कार्यक्रम के प्रतिभागी शामिल थे। ये विशिष्ट अतिथि देश के विभिन्न क्षेत्रों से आमंत्रित किए गए थे। इनमें वे नागरिक भी शामिल रहे जिन्होंने रोजगार सृजन, नवाचार, अनुसंधान, खेल, कृषि, विज्ञान, सामाजिक सशक्तिकरण और राष्ट्र निर्माण के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

इस पहल का उद्देश्य राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले नागरिकों को सम्मानित करना तथा राष्ट्रीय आयोजनों में जन-भागीदारी को और सशक्त बनाना था। कर्तव्य पथ पर इन विशिष्ट अतिथियों के बैठने की विशेष व्यवस्था की गई थी। वहीं राज्यों की झांकियों की बात करें तो असम की मनमोहक झांकी में आशारिकांडी यानी असम के टेराकोटा शिल्प ग्राम को दर्शाया गया था। गुजरात की झाँकी स्वदेशी का मंत्र: आत्मनिर्भरता और स्वतंत्रता – वंदे मातरम् पर आधारित थी। हिमाचल प्रदेश की झाँकी में देव भूमि, वीर भूमि के दर्शन हुए। जम्मू-कश्मीर की झाँकी जम्मू-कश्मीर के हस्तशिल्प और लोकनृत्य को समर्पित रही।

मणिपुर की झांकी ‘समृद्धि की ओर: कृषि क्षेत्रों से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक’ की थीम पर केंद्रित थी। ओडिशा अपनी झांकी के माध्यम से मिट्टी से सिलिकॉन तक: परंपरा में निहित, नवाचार के साथ उन्नति को दर्शा रहा था। तमिलनाडु की झांकी में समृद्धि का मंत्र: आत्मनिर्भर भारत की झलक दिखाई दी। उत्तर प्रदेश ने इस बार अपनी झांकी में बुंदेलखंड की संस्कृति को प्रदर्शित किया। मध्य प्रदेश की झांकी पुण्यश्लोक लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर पर आधारित रही।

वहीं, पंजाब की झांकी श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की शहादत के 350 वर्ष पर केंद्रित थी। वायु सेना मुख्यालय ने अपनी झांकी में ‘पूर्व सैनिक झांकी: युद्ध के माध्यम से राष्ट्र निर्माण’ को दिखाया। त्रि-सेवा झांकी में ऑपरेशन सिंदूर, संयुक्तता से विजय को प्रदर्शित किया गया। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: विकसित भारत की ओर अग्रसर भारतीय स्कूली शिक्षा पर आधारित झांकी प्रदर्शित की।

Pic Credit : ANI


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