सीरिया से इराक लाए गए 150 आईएस कैदी

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इराक ने पहली बार सीरिया की जेलों में बंद इस्लामिक स्टेट (आईएस) के 150 कैदियों को अपने देश में स्वीकार किया है। इराकी अधिकारियों ने बुधवार (स्थानीय समय) को इसकी पुष्टि की।  

इन कैदियों में इराकी नागरिकों के साथ-साथ विदेशी नागरिक भी शामिल हैं, जिन पर इराकी आम लोगों की हत्या में गहरी भूमिका निभाने के आरोप हैं।

इराकी सेना के कमांडर-इन-चीफ के प्रवक्ता सबाह अल-नुमान के बयान के मुताबिक ये कैदी पहले सीरिया के हसाका क्षेत्र में उन जेलों में बंद थे, जो सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेज (एसडीएफ) के नियंत्रण में हैं। अंतरराष्ट्रीय गठबंधन (जो आईएस के खिलाफ लड़ाई में जुटा है) के साथ समन्वय के बाद इन कैदियों को इराक को सौंपा गया।

सिन्हुआ न्यूज एजेंसी के रिपोर्ट में कहा गया है कि इन सभी कैदियों को इराक के आधिकारिक सरकारी सुधार गृहों (करैक्शनल इंस्टीट्यूशंस) में भेजा जाएगा। साथ ही यह भी साफ किया गया कि आगे कितने और कैदियों को कब लाया जाएगा, यह सुरक्षा हालात और आकलन पर निर्भर करेगा।

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अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के अनुसार, इन कैदियों को सीरिया के हसाका स्थित एक हिरासत केंद्र से इराक के एक सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया गया है। यह प्रक्रिया एक व्यापक योजना का हिस्सा है, जिसके तहत भविष्य में करीब 7,000 आईएस कैदियों को इराक के नियंत्रण वाली जेलों में लाया जा सकता है।

सेंटकॉम ने अपने बयान में कहा कि इस तरह का सुरक्षित और व्यवस्थित स्थानांतरण बेहद जरूरी है ताकि किसी भी तरह की जेल से भागने की घटना को रोका जा सके, जो अमेरिका और पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए सीधा खतरा बन सकती है।

पिछले एक साल में अमेरिका और उसके साझेदार बलों ने सीरिया में 300 से ज्यादा आईएस सदस्यों को गिरफ्तार किया है और 20 से अधिक आतंकियों को मार गिराया है।

इंटरनेशनल सेंटर फॉर काउंटर-टेररिज्म थिंक टैंक के एसोसिएट फेलो एड्रियन श्टुनी के अनुसार, 2025 तक, यानी आईएस की स्थापना के करीब 21 साल बाद, इराक और सीरिया में संगठन की क्षेत्रीय पकड़ काफी कमजोर हो चुकी है।

उन्होंने बताया कि अपने चरम पर आईएस के पास करीब 80,000 लड़ाके थे, जिनमें 120 से ज्यादा देशों के 42,000 से अधिक विदेशी आतंकवादी शामिल थे। इसके मुकाबले, 2025 के मध्य तक सीरिया और इराक में सक्रिय लड़ाकों की संख्या सिर्फ 1,500 से 3,000 के बीच आंकी जा रही है। हालांकि, यह भी चेताया गया है कि वैश्विक स्तर पर आईएस का खतरा अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

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