अमेरिकी दबाव में भारत ने चाबहार पोर्ट छोड़ा

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नई दिल्ली। मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस पार्टी ने बड़ा आरोप लगाया है। कांग्रेस ने कहा है कि भारत सरकार ने अमेरिका के दबाव में ईरान के चाबहार पोर्ट पर अपना नियंत्रण छोड़ दिया है। कांग्रेस का आरोप है कि इससे भारत को 11 सौ करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है, ‘मोदी सरकार ने चाबहार प्रोजेक्ट में देश की जनता के 120 मिलियन डॉलर यानी करीब 11 सौ करोड़ रुपए लगाए थे। अब ये बरबाद हो चुका है’। गौरतलब है कि अमेरिका ने ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों पर 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाया है।

हालांकि कांग्रेस के इस आरोप को विदेश मंत्रालय ने खारिज किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा है कि ईरान के चाबहार पोर्ट से जुड़ी योजनाएं जारी हैं। उन्होंने कहा है कि इन्हें आगे बढ़ाने के लिए भारत, अमेरिका से बातचीत कर रहा है। अमेरिका ने भारत को ईरान पर लगे प्रतिबंधों के बावजूद चाबहार पोर्ट से जुड़े काम जारी रखने के लिए एक खास छूट दी है, जिसकी अवधि 26 अप्रैल 2026 को खत्म हो रही है।

असल में अमेरिका ने भारत को 27 अक्टूबर 2025 तक के लिए चाबहार पोर्ट से व्यापार करने की छूट दी थी। इसके खत्म होने से पहले ही एक बार फिर अमेरिका ने इसे छह महीने के लिए बढ़ा दिया। यानी अब यह छूट 26 अप्रैल 2026 तक मिलती रहेगी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को बताया कि 28 अक्टूबर 2025 को अमेरिकी वित्त विभाग ने भारत को एक पत्र भेजकर इस छूट से जुड़े दिशा निर्देश दिए थे।

जायसवाल ने कहा कि भारत अब इसी तय व्यवस्था के तहत अमेरिका से बातचीत कर रहा है, ताकि चाबहार पोर्ट से जुड़े काम बिना रुकावट आगे बढ़ते रहें। गौरतलब है कि अमेरिका ने ईरान के चाबहार पोर्ट पर प्रतिबंध इसलिए लगाए क्योंकि वह ईरान पर आर्थिक और राजनीतिक दबाव बनाना चाहता है। अमेरिका का मानना है कि ईरान बंदरगाहों, तेल व्यापार और अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं से मिलने वाले पैसों का इस्तेमाल अपने परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल विकास और पश्चिम एशिया में अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए करता है।


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