बांग्लादेश में चुनाव पर अवामी लीग का बड़ा आरोप: शेख हसीना

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बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले चुनाव को लेकर तमाम राजनीतिक दल एक्टिव मोड में हैं। हालांकि, बांग्लादेश के इस आम चुनाव से शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग को प्रतिबंधित कर दिया गया है। अवामी लीग ने चुनाव में भागीदारी को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक गुहार लगाई, लेकिन कुछ मदद नहीं मिली। अब हसीना की पार्टी ने आरोप लगाया है कि फरवरी 2026 चुनाव में लोकतंत्र को नकारा गया और कट्टरपंथ को बढ़ावा दिया गया है। 

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अवामी लीग ने लिखा, “बांग्लादेश के फरवरी 2026 के चुनाव को लोकतंत्र की वापसी के तौर पर बेचा जा रहा है। असल में, यह लोगों को बाहर रखने की एक सोची-समझी कोशिश है। अवामी लीग पार्टी को लगभग 60% वोटरों का समर्थन हासिल है। अवामी लीग पर बैन लगाकर यूनुस सरकार ने ज्यादातर नागरिकों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से बाहर कर दिया है। जिस चुनाव में ज्यादातर लोगों को बाहर रखा जाता है, वह लोकतंत्र नहीं है। यह नियंत्रण करना है।

पार्टी ने आगे लिखा, “कोई भी भरोसेमंद लोकतंत्र अपनी सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी पर बैन नहीं लगाती और फिर भी वैधता का दावा करती है। लोकतंत्र में मुकाबला होता है। तानाशाही सिस्टम विपक्ष को खत्म कर देते हैं। पिछले चुनाव में नाकामी का बहाना नहीं चलता। शेख हसीना के राज में, किसी भी रजिस्टर्ड पार्टी पर बैन नहीं लगाया गया।

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अवामी लीग ने कहा कि भागीदारी में कमी बायकॉट की वजह से आई, न कि सरकार के लगाए बैन की वजह से। चुनाव न लड़ने का मतलब यह नहीं है कि चुनाव लड़ने से मना किया जा रहा है और यह फर्क जानबूझकर मिटाया जा रहा है। इसके नतीजे खतरनाक हैं। सबसे मजबूत लोकतांत्रिक ताकत को हटाने से अतिवादी राजनीति के लिए रास्ता साफ हो जाता है। वोटरों द्वारा बार-बार नकारे गए समूह अब अपने आप सामान्य हो गए हैं। यह कोई सुधार नहीं है, यह कट्टरपंथ राजनीतिक इंजीनियरिंग है।

अवामी लीग ने कहा, “जिन बदनाम लोगों को जनता ने एक बार नकारा था, उन्हें फिर से बसाया जा रहा है। असली चुनावी विकल्प को हटाकर भ्रष्टाचार, हथियारों की तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग को नेतृत्व में लाया जा रहा है। इतिहास साफ है, बिना विकल्प के चुनाव स्थिरता नहीं लाते हैं। बाहर रखने से कट्टरपंथ बढ़ता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस प्रक्रिया को सही नहीं ठहराना चाहिए। अवामी लीग के बिना चुनाव लोकतांत्रिक नहीं है। यह लोकतंत्र की आत्महत्या है, और इसके नतीजे बांग्लादेश की सीमाओं तक ही सीमित नहीं रहेंगे।

शेख हसीना की सरकार गिराए जाने के बाद अवामी लीग पर चुनाव लड़ने से प्रतिबंध लगाए गए। वहीं, शेख हसीना देश छोड़ चुकी हैं और उन्हें कई मामलों में दोषी सिद्ध कर मौत और 21 साल की जेल की सजा सुनाई गई है।

Pic Credit : ANI


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