नैसकॉम पर नज़र

Categorized as संपादकीय

एआई के नए टूल्स आने से ना सिर्फ भारतीय टेक क्षेत्र, बल्कि समग्र अर्थव्यवस्था पर आशंकाएं मंडरा रही हैं। गौरतलब है कि गुजरे तीन दशकों में भारत में टेक सेक्टर उपभोक्ता मध्य वर्ग निर्मित करने वाला प्रमुख कारोबार रहा है।

जिस समय बड़ी टेक कंपनियों के शेयर भाव में गिरावट का सिलसिला थम नहीं रहा है, नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एवं सर्विस कंपनीज (नैसकॉम) की बैठक पर निगाहें टिकना लाजिमी है। दुनिया में तकनीक सेवादाता कंपनियों के शेयरों के भाव में गिरावट का सीधा कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नए टूल्स का सामने आना है। खासकर अमेरिकी कंपनी एंथ्रोपिक ने अपने क्लाउड ऐप पर ऐसी सेवाएं दी हैं, जिनसे राय बनी है कि वे वो काम करने में सक्षम हैं, जिनकी सेवाएं टीसीएस, इन्फोसिस, विप्रो आदि जैसी टेक कंपनियां देती रही हैं। इसलिए इस महीने ऐसी भारतीय कंपनियों के शेयरों के भाव रोजमर्रा के स्तर पर गिरे हैं।

भारतीय टेक शेयरों में गिरावट का बड़ा कारण विदेशी निवेशकों का इनसे पैसा निकालना है। इस घटनाक्रम से ना सिर्फ भारत के टेक क्षेत्र, बल्कि समग्र अर्थव्यवस्था पर आशंकाएं मंडरा रही हैं। भारत में टेक सेक्टर अर्थव्यवस्था का सिर्फ एक क्षेत्र भर नहीं है। बल्कि गुजरे तीन दशकों में यह उपभोक्ता मध्य वर्ग निर्मित करने वाला प्रमुख कारोबार रहा है। पिछले साल टेक कंपनियों में 58 लाख कर्मी कार्यरत थे। आयकर आंकड़ों के मुताबिक भारत में स्थायी वेतन से होने वाली कुल आय में टेक कर्मियों का हिस्सा साढ़े 25 प्रतिशत से अधिक रहा। केंद्र सरकार के कर्मचारियों की कुल तनख्वाह से यह हिस्सा सवा तीन गुना ज्यादा है। एआई से यह क्षेत्र सिकुड़ा, तो जाहिर है, उससे भारत की पूरी अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी।

इसीलिए मंगलवार को हो रही नैसकॉम की बैठक को अहम माना गया है, जिसमें भारत में एआई को अपनाने की गति और उद्योगों पर उसका प्रभाव चर्चा का प्रमुख मुद्दा होंगे। भारतीय टेक कंपनियां आश्वासन देती रही हैं कि एआई के उपयोग से उनके कामकाज पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। उनके मुताबिक एआई दौर की जरूरतों के मुताबिक वे तेजी से खुद को ढाल रही हैं। मगर जिस तरह पिछले वर्ष टीसीएस जैसी कंपनियों ने कर्मचारियों की छंटनी की, उसके मद्देनजर ऐसे से आश्वासनों से ना तो बाजार का रुख बदला है, और ना ही सार्वजनिक चर्चाओं में अंदेशे घटे हैं। तो क्या आज की नैसकॉम की बैठक इस बारे में भरोसा बंधा पाएगी?


Previous News Next News

More News

कैबिनेट से मंत्रियों की विदाई का सिलसिला

July 30, 2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट से मंत्रियों की विदाई का सिलसिला जारी है। अलग अलग कारणों से मंत्री इस्तीफा दे रहे हैं। कुछ और मंत्रियों का इस्तीफा होना है, जिसका इंतजार चल रहा है। हालांकि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा थोड़ी अलग परिस्थितियों में हुआ है। इसकी तुलना यूपीए दो की सरकार में खेल मंत्री रहे…

किसान सम्मान के नाम से ई-20 पेट्रोल बिकेगा

July 30, 2026

भारतीय जनता पार्टी और उसकी केंद्र सरकार के बारे में एक बात माननी होगी। दोनों अपने किसी फैसले को जस्टिफाई करने के लिए कोई भी तर्क खोज सकते हैं। जरूरी नहीं है कि फैसले को जस्टिफाई करने के लिए प्राइमरी तर्क पर ही अड़े रहे हैं। आमतौर पर कोई भी व्यक्ति या सरकार अपने फैसले…

ओवैसी का बिहार वाला दांव यूपी में भी

July 30, 2026

एमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने बिहार में एक दांव चला था। उन्होंने पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव से पहले लालू प्रसाद और कांग्रेस के सामने प्रस्ताव रखा था कि उनकी पार्टी को गठबंधन में शामिल किया जाए। बिहार के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान गाजे बाजे के साथ लालू प्रसाद के निवास के बाहर पहुंच…

जस्टिस यशवंत वर्मा की क्या स्थिति है?

July 30, 2026

यह लाख टके का सवाल है कि दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट भेजे गए जस्टिस यशवंत वर्मा की क्या स्थिति है? साथ यह भी सवाल है कि उनके खिलाफ लंबित महाभियोग के मामले की क्या स्थिति है? संसद के सत्र आ रहे हैं और जा रहे हैं। दुनिया भर की दूसरी बातों की…

केरल हारने का कारण खोज लिया सीपीएम ने

July 30, 2026

केरल में लगातार 10 साल राज करने के बाद सीपीएम के नेतृत्व वाला गठबंधन एलडीएफ इस साल मई के चुनाव में हार गया था। उसके बाद से पार्टी में इस बात को लेकर मंथन चल रहा था कि सब कुछ ठीक था तो पार्टी क्यों हारी? इसके लिए पार्टी के बड़े नेताओं के बीच मंथन…

logo