एक के खिलाफ दूसरा

समस्या की जड़ वह आर्थिक दिशा है, जिसमें धन का कुछ परिवारों में संकेंद्रण होता गया है। उस पर ध्यान ना देकर वंचित तबके जातीय आधार पर एक दूसरे के खिलाफ लामबंदी कर रहे हैं। समाज के लिए यह चिंताजनक घटनाक्रम है। महाराष्ट्र सरकार के सामने एक (मराठा) को मनाएं, तो दूजा (ओबीसी) रूठ जाता… Continue reading एक के खिलाफ दूसरा

बिहार से शुरुआत हो

कई चरणों में मतदान आम चलन बना हुआ है। मगर साथ ही यह धारणा भी मजबूत हुई है कि इस तरह चुनाव को अत्यधिक खर्चीला बनाया गया है, जिससे कम संसाधन वाले दलों के लिए प्रतिकूल स्थितियां बनी हैं। बिहार के राजनीतिक दलों में बनी यह सहमति महत्त्वपूर्ण है कि विधानसभा चुनाव के लिए मतदान… Continue reading बिहार से शुरुआत हो

स्टेबलकॉइन की चुनौती

वित्त मंत्री के बयान को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए कि बदले हालात में तमाम देश अब स्टेबलकॉइन्स को नजरअंदाज नहीं कर सकते। इसलिए कि स्टेबलकॉइन जैसे आविष्कार मुद्रा एवं पूंजी के प्रवाह का रूप बदल रहे हैं। डॉनल्ड ट्रंप के दौर में क्रिप्टो करेंसी- खासकर स्टेबलकॉइन्स को मिली स्वीकृति तमाम देश के लिए… Continue reading स्टेबलकॉइन की चुनौती

बात है मुद्दे की

बिहार में जारी अंतिम मतदाता सूची में ज्यादा खामियां नहीं हैं, तो अब ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर विराम लग जाएगा। वैसे भी यह मुद्दा विपक्षी कार्यकर्ताओं को जितना गोलबंद कर पाया, आम मतदाताओं पर इसका उतना असर नहीं दिखा था। बिहार में विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) पूरा होने के बाद अंतिम मतदाता सूची को जारी… Continue reading बात है मुद्दे की

इनसे छीनो, उनको दो!

हाल के वर्षों में बिजली की किल्लत घटी है और अच्छी सड़कें बनी हैं। मगर बिजली सस्ती नहीं हुई है और टोल-टैक्स से सड़क परिवहन महंगा बना हुआ है। ये सभी लागतें आखिरकार उत्पाद की कीमत में ही शामिल होती हैं। महाराष्ट्र सरकार ने व्यापारिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए बिजली पर अतिरिक्त कर को… Continue reading इनसे छीनो, उनको दो!

मूल बात ही गायब

ट्रंप की शांति योजना में दो राज्य सिद्धांत के तहत अलग फिलस्तीन की स्थापना का कोई प्रावधान नहीं है, जबकि यह फॉर्मूला खुद अमेरिकी मध्यस्थता में तत्कालीन इजराइल सरकार और फिलस्तीनी मुक्ति संगठन ने स्वीकार किया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने फिलस्तीन के लिए जो कथित शांति योजना पेश की है, उससे इस मसले… Continue reading मूल बात ही गायब

बिगड़ती जा रही बात

लद्दाख में असंतोष गहराना भारत के लिए नई चुनौतियां पैदा कर सकता है। भारत सरकार को वहां वैसा एकतरफा रुख नहीं अपनाना चाहिए, जैसा वह अन्य जन समूहों के आंदोलनों के समय अपनाती रही है। उसे लद्दाख की बात सुननी चाहिए। लद्दाख के संगठन- एपेक्स बॉडी लेह (एबीएल) का केंद्र के साथ बातचीत से हटना… Continue reading बिगड़ती जा रही बात

बलि चढ़ता भविष्य

तेजस्वी नीतीश की घोषणाओं की आलोचना कर रहे हैं। मगर बात वोट खरीदने की हो, तो जुबानी शाहखर्ची में वे भी कोताही नहीं बरतते। और यह कहानी देश भर की है। इस होड़ में जनता के भविष्य की बलि चढ़ रही है। बिहार में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले जिन 75 लाख परिवारों के पास… Continue reading बलि चढ़ता भविष्य

ऐसे भी क्या खेलना!

यूएई में हुआ एशिया कप क्रिकेट टूर्नामेंट खेल से इतर बातों के लिए ज्यादा याद रखा जाएगा। यहां भारतीय खिलाड़ियों के कंधों पर अपनी सरकार और क्रिकेट बोर्ड की डगमगाहट को संभालने का बोझ भी डाल दिया गया था। एशिया कप में भारतीय क्रिकेट टीम आरंभ से अंत तक चैंपियन की तरह खेली। जिस टूर्नामेंट… Continue reading ऐसे भी क्या खेलना!

धन किसका, कर्ज कहां?

आबादी का छोटा-सा जो हिस्सा वित्तीय अर्थव्यवस्था से जुड़ा है, उसकी चमक बढ़ी है। मगर विषमता इतनी तेजी से बढ़ी है कि वित्तीय सेवाएं देने वाली जर्मन मूल की बहुराष्ट्रीय कंपनी- एलायंज ग्रुप- ने भी चेतावनी दी है। पहले खबर का अच्छा पहलूः 2024 में भारतीय घरों की औसत आमदनी बढ़ने की रफ्तार और तेज… Continue reading धन किसका, कर्ज कहां?

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