यह समझने की जरूरत है कि मांगों पर तत्परता से ध्यान ना देने अथवा अनंत और ऊबाऊ वार्ताओं से लोगों का असंतोष आक्रोश में बदलता है। उससे गतिरोध की स्थिति बनती है, जो अमन-चैन के लिए ठीक नहीं है। केंद्र ने लेह में हुई हिंसा की सारी जिम्मेदारी सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पर डाल दी… Continue reading हर प्रतिरोध नाजायज है?
