अगड़ा-पिछड़ा राजनीति का दांव मुश्किल

बिहार विधानसभा चुनाव में बड़ी सावधानी से अगड़ा और पिछड़ा का दांव खेलने का प्रयास हो रहा है। राष्ट्रीय जनता दल के नेता अशोक महतो का यह बयान कि, ‘भूराबाल पूरी तरह से साफ कर देना है’, इसी राजनीति का संकेत है। इससे पहले राजद की प्रवक्ता सारिका पासवान और सवर्ण नेता आशुतोष कुमार के… Continue reading अगड़ा-पिछड़ा राजनीति का दांव मुश्किल

सरकारों को हराना अब मुश्किल है!

इस पर गंभीरता से अध्ययन करने की जरुरत है कि जो सरकार में है उसके हारने का अनुपात क्यों कम होता जा रहा है? यह भी देखने की जरुरत है कि क्या एंटी इन्कम्बैंसी यानी सत्ता विरोध, जो भारतीय राजनीति में हमेशा निर्णायक फैक्टर होता था उसकी प्रासंगिकता खत्म हो गई है? ये दो सवाल… Continue reading सरकारों को हराना अब मुश्किल है!

राहुल के आरोपों की जांच जरूरी

हालांकि राहुल गांधी जब तक चुनाव जीत नहीं जाते हैं, तब तक संतुष्ट नहीं होंगे और वोट चोरी के आरोप लगाते रहेंगे फिर भी वे जो आरोप लगा रहे हैं उनकी गहराई से जांच होनी चाहिए। आयोग को आगे आकर खुद जांच का ऐलान करना चाहिए और अगर हो सके तो सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा… Continue reading राहुल के आरोपों की जांच जरूरी

उम्मीदवार नहीं नेता लड़ेंगे चुनाव

भारतीय राजनीति में यह प्रवृत्ति अब सांस्थायिक रूप लेती जा रही है। नरेंद्र मोदी की कमान में भाजपा ने इस प्रवृत्ति को एक सिद्धांत में बदला और अब सारी पार्टियां इसे अपना रही हैं। सिद्धांत यह है कि उम्मीदवार चुनाव नहीं लड़ेगा, बल्कि एक सर्वोच्च नेता चुनाव लड़ेगा और एक दूसरे बड़ा नेता चुनाव की… Continue reading उम्मीदवार नहीं नेता लड़ेंगे चुनाव

भारत-पाक मैच भाजपा को भारी पड़ेगा

भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विरोधाभासी राजनीति की कई मिसालें कायम की हैं। अनेक ऐसे उदाहरण हैं, जब प्रधानमंत्री और उनकी पार्टी ने कहा कुछ और किया उससे बिल्कुल उलट। कहा कि आकंठ भ्रष्टाचार में डूबे अजित पवार जेल जाएंगे, लेकिन उनको अपने गठबंधन में शामिल करके महाराष्ट्र का उप मुख्यमंत्री बना… Continue reading भारत-पाक मैच भाजपा को भारी पड़ेगा

पार्टियों को खुद सुधार करना होगा

भारत में राजनीतिक दल संविधान, लोकतत्र, संसदीय व्यवस्था, नैतिकता, परंपरा आदि की जितनी बातें करते हैं अगर उसके एक प्रतिशत पर भी अमल करते तो देश की राजनीति ऐसी स्थिति में नहीं पहुंची होती कि उसमें सुधार के लिए लोगों को सर्वोच्च अदालत के पास जाना होता और अदालत को भी नोटिस जारी करना पड़ता!… Continue reading पार्टियों को खुद सुधार करना होगा

विपक्ष नहीं छोड़ेगा एसआईआर का मुद्दा

चुनाव आयोग ने इस साल के अंत में पूरे देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर का फैसला किया है। आयोग ने सभी राज्यों के मुख्य चुनाव अधिकारियों की बैठक बुलाई थी, जिसमें इस पर विस्तार से चर्चा हुई है। इस बैठक से ठीक पहले चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश… Continue reading विपक्ष नहीं छोड़ेगा एसआईआर का मुद्दा

उप राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष को क्या मिला?

यह सवाल अजीब लग सकता है कि जब विपक्षी पार्टियों के साझा उम्मीदवार चुनाव हार गए तो भला विपक्ष को क्या मिलेगा? लेकिन ऐसा नहीं है कि विपक्ष पूरी तरह से खाली हाथ रहा। इस चुनाव से विपक्ष की एकजुटता को ताकत मिली है। विचारधारा की लड़ाई का नैरेटिव कायम रहा और गठबंधन की डोर… Continue reading उप राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष को क्या मिला?

जीएसटी सुधार का फैसला भी जल्दबाजी में

जिस तरह से अप्रत्यक्ष कर में सुधार की रामबाण दवा के नाम पर वस्तु व सेवा कर यानी जीएसटी को ‘एक देश, एक कर’ बता कर हड़बड़ी में लागू किया गया उसी तरह आठ साल  के बाद जीएसटी में सुधार को भी जल्दबाजी में लागू कर दिया गया है। हालांकि इसमें कोई संदेह नहीं है… Continue reading जीएसटी सुधार का फैसला भी जल्दबाजी में

फीलगुड फैक्टर कितना काम आएगा?

अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भाजपा ने 2004 का लोकसभा चुनाव ‘फीलगुड’ और ‘शाइनिंग इंडिया’ के नारे और नैरेटिव पर लड़ा था। चारों तरफ चमकते भारत की तस्वीर दिखाई जा रही थी। लेकिन उनका गठबंधन चुनाव हार गया था। उस समय लगा था कि  इन नारों ने लोगों को आहत कर दिया क्योंकि जमीनी… Continue reading फीलगुड फैक्टर कितना काम आएगा?

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