सभ्यता अगली पीढ़ी में अपनी आशा निवेश करती है। नौकरशाही अगली पीढ़ी को फाइलों, नियमों और कट-ऑफ के बीच छांटती है। जब शिक्षा जैसी सृजनात्मक प्रक्रिया को केवल परीक्षा एजेंसियों की यांत्रिक व्यवस्था में बदल दिया जाता है, तब यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं होती। यह उस गणराज्य के नैतिक उद्देश्य का क्षरण बन जाती… Continue reading ऐसी व्यवस्था, जो अच्छी शिक्षा नहीं देती, युवाओं से ही डरने लगती है!
