एआई: जीवनसाथी या शत्रु?

Categorized as लेख

एआई का सबसे घातक प्रभाव रचनात्मकता पर पड़ रहा है। पहले कलाकार, लेखक और संगीतकार अपनी कल्पना से कृतियां रचते थे। अब मिडजर्नी या डैल-ई जैसे टूल्स प्रॉम्प्ट पर चित्र बना देते हैं, वो भी सुंदरता भरे। लेकिन क्या यह रचनात्मकता है? शिखर सम्मेलन में भारतीय कलाकारों ने प्रदर्शन किया कि एआई जनित कला में आत्मा का अभाव है। यह डेटा पर आधारित नकल मात्र है।

अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जीवन का अभिन्न अंग बन चुकी है। स्मार्टफोन से लेकर स्मार्ट होम तक, हर जगह एआई की छाप दिखाई देती है। इस सप्ताह नई दिल्ली में शुरू हुए अंतरराष्ट्रीय एआई प्रभाव शिखर सम्मेलन में विश्व के नेता और विशेषज्ञ इसी पर चर्चा कर रहे हैं। इस शिखर सम्मेलन का उद्देश्य एआई के वैश्विक प्रभावों को समझना और नीतियां बनाना है,

लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या हम एआई को अपनाते हुए अपनी स्वतंत्रता और रचनात्मकता को खो नहीं रहे? एआई ने सुविधाएं तो दी हैं, लेकिन साथ ही हमें इतना आश्रित बना दिया है कि बिना इसके सोचना भी मुश्किल हो गया है। सोचने वाली बात यह भी है कि कैसे एआई जीवन को सरल बना रहा है, लेकिन रचनात्मकता को नष्ट कर रहा है।

एआई की निर्भरता अब दैनिक जीवन का हिस्सा बन गई है। कल्पना कीजिए, सुबह उठते ही गूगल असिस्टेंट या सिरी आपको मौसम, ट्रैफिक और समाचार बता देता है। कार्यालय में ईमेल लिखने से लेकर डेटा विश्लेषण तक, चैटजीपीटी जैसे टूल्स सब कुछ तुरंत कर देते हैं। भारत में, जहां डिजिटल इंडिया अभियान ने 80 करोड़ से अधिक इंटरनेट उपयोगकर्ता पैदा किए हैं, एआई आधारित ऐप्स जैसे उबर, जोमैटो, ब्लिंकिट आदि ने जीवन को अभूतपूर्व सरलता प्रदान की है।

दिल्ली में हुआ अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में अमेरिकी विशेषज्ञों ने बताया कि एआई ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में 15 ट्रिलियन डॉलर का योगदान दिया है, लेकिन यह निर्भरता खतरनाक साबित हो रही है। एक सर्वे के अनुसार, 70% युवा बिना एआई टूल्स के रिसर्च नहीं कर पाते। समस्या तब गंभीर हो जाती है जब बिजली चली जाए या इंटरनेट कनेक्टिविटी बाधित हो जाए तो लोग हतप्रभ रह जाते हैं।

यह निर्भरता शिक्षा क्षेत्र में सबसे अधिक दिखाई दे रही है। छात्र अब निबंध लिखने के बजाय एआई से कॉपी-पेस्ट कर लेते हैं। कोटा के कोचिंग संस्थानों से लेकर आईआईटी तक, एआई टूल्स ने होमवर्क को आसान बना दिया, लेकिन समझ की गहराई कम कर दी। शिखर सम्मेलन के एक सत्र में यूरोपीय संघ के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि एआई जनित सामग्री से छात्रों की आलोचनात्मक सोच 30% घटी है। भारत में एनसीईआरटी ने एआई उपयोग पर दिशानिर्देश जारी किए हैं, लेकिन फ़िलहाल इसका अमल कमजोर है। परिणामस्वरूप, आने वाली पीढ़ी समस्या-समाधान के बजाय ‘प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग’ सीख रही है, यानी एआई को सही सवाल कैसे पूछें। यह निर्भरता मानसिक आलस्य को जन्म दे रही है, जहां स्वयं सोचने की क्षमता क्षीण हो रही है।

एआई का सबसे घातक प्रभाव रचनात्मकता पर पड़ रहा है। पहले कलाकार, लेखक और संगीतकार अपनी कल्पना से कृतियां रचते थे। अब मिडजर्नी या डैल-ई जैसे टूल्स प्रॉम्प्ट पर चित्र बना देते हैं, वो भी सुंदरता भरे। लेकिन क्या यह रचनात्मकता है? शिखर सम्मेलन में भारतीय कलाकारों ने प्रदर्शन किया कि एआई जनित कला में आत्मा का अभाव है। यह डेटा पर आधारित नकल मात्र है। उदाहरणस्वरूप, बॉलीवुड में एआई स्क्रिप्ट राइटर आ रहे हैं, जो पुरानी फिल्मों के पैटर्न दोहराते हैं। नतीजा? नवीनता का लोप। एक अध्ययन बताता है कि एआई सहायता से बनी कहानियां 40% कम मूल होती हैं। लेखन में भी यही समस्यादिखाई दी जाती है। एआई से उत्पन्न संपादकीय या कविताएं सतही लगती हैं, क्योंकि उनमें व्यक्तिगत अनुभव का पुट नहीं।

रचनात्मकता नष्ट होने का एक कारण एआई की ‘परफेक्शन’ है। यह त्रुटिरहित उत्तर देता है, जिससे मानव प्रयास कमजोर लगने लगते हैं। कल्पना कीजिए एक चित्रकार को, वह घंटों ब्रश चलाता है, गलतियां सुधारता है और यही प्रक्रिया रचनात्मकता को परिपक्व बनाती है। परंतु एआई में यह संघर्ष नहीं होता। शिखर सम्मेलन के दौरान रिलीज हुई एक रिपोर्ट में कहा गया कि एआई ने वैश्विक पेटेंट आवेदनों में 25% वृद्धि की, लेकिन अधिकांश ‘इंक्रीमेंटल’ हैं, यानी नई खोजें कम हैं। भारत जैसे विकासशील देश में, जहां स्टार्टअप संस्कृति फल-फूल रही है, एआई निर्भरता नवाचार को कुचल सकती है। उदाहरण के तौर पर, फिनटेक क्षेत्र में एआई एल्गोरिदम ऋण स्वीकृति करते हैं, लेकिन सृजनात्मक समाधान गायब हैं।

इसके अलावा, एआई नैतिक दुविधाओं को भी जन्म दे रहा है। डीपफेक वीडियो से राजनीतिक हेरफेर भी हो रहे हैं। 2024 के अमेरिकी चुनावों में एआई ने काफ़ी अफवाहें फैलाईं। इसे देखते हुए भारत में भी आगामी चुनावों से पहले सतर्कता बरतना सार्थक बन जाता है। शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने एआई के ‘जिम्मेदार उपयोग’ पर जोर दिया, लेकिन निर्भरता रोकने के उपाय कम चर्चित हुए। क्या हम एआई को मास्टर बना लेंगे?

एआई की निर्भरता का एक नमूना आज हर घर में दिखाई देता है। बच्चे आजकल हर ज़रूरत का सामान ऑनलाइन मंगवा लेते हैं। दुकान पर जाए बिना, किसी वस्तु की गुणवत्ता व मोल-भाव का युग अब बहुत कम दिखाई देता है। मुझे याद है हमारे बचपन में हमें बाज़ार भेजा जाता था और किसी भी वस्तु को खरीदने के बाद सही हिसाब से बच्चे हुए पैसे वापिस लेने में जो संतोष मिलता था उसका अपना ही आनंद था। परंतु आजकल के बच्चों में यह दिखाई नहीं देता।

ऐसे में इसका समाधान क्या है? सबसे पहले, शिक्षा में एआई को सहायक न मानकर चुनौती बनाएं। स्कूलों में ‘एआई-मुक्त’ घंटे रखें, जहां बच्चे स्वयं रचें। दूसरा, नीतियां बनाएं; जैसे यूरोप का जीडीपीआर, जो एआई पारदर्शिता सुनिश्चित करता है। भारत को शिखर सम्मेलन से प्रेरणा लेनी चाहिए और ‘एआई साक्षरता’ अभियान चलाना चाहिए। तीसरा, रचनाकारों को प्रोत्साहित करें, उन्हें सरकारी अनुदान दें जो एआई-रहित कला को बढ़ावा दें। व्यक्तिगत स्तर पर, हमें ‘डिजिटल डिटॉक्स’ को भी अपनाना होगा। एआई जीवन का हिस्सा बने रहना चाहिए, लेकिन इस पर निर्भरता और रचनात्मक विनाश को रोकना होगा। रचनात्मकता मानव का मूल गुण है, इसे बचाना हमारा कर्तव्य है।


Previous News Next News

More News

लोकसभा में विपक्ष का हंगामा, लगातार आठवें दिन नहीं चल सका प्रश्नकाल

July 30, 2026

लोकसभा में बृहस्पतिवार को विभिन्न मुद्दों पर कांग्रेस समेत विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण प्रश्नकाल लगातार आठवें दिन नहीं चल सका और कार्यवाही शुरू होने के कुछ मिनट के भीतर दोपहर दो बजे तक स्थगित कर दी गई। कांग्रेस सदस्यों को बुधवार को सदन में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भाषण के दौरान पैदा…

भारत से लगे नेपाल के इलाकों में चौथे दिन भी कर्फ्यू जारी

July 30, 2026

नेपाल के कोशी प्रांत में भारत की सीमा से लगे सुनसरी जिले के कई हिस्सों में सांप्रदायिक हिंसा के बाद बृहस्पतिवार को लगातार चौथे दिन अनिश्चितकालीन कर्फ्यू जारी रहा। इस हिंसा में एक व्यक्ति की मौत हो गई है जबकि कई अन्य लोग घायल हुए हैं। सुनसरी के सहायक मुख्य जिला अधिकारी पोषण लामिछाने ने…

राजस्थान: आठ जिलों में स्थाई लोक अदालतों के गठन को मंजूरी

July 30, 2026

राजस्थान सरकार ने आठ जिलों में स्थाई लोक अदालतों के गठन को मंजूरी दी है। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इन स्थाई लोक अदालतों के गठन के प्रस्ताव को अनुमोदित किया। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के निर्णय के तहत फलौदी, डीडवाना-कुचामन, खैरथल-तिजारा, ब्यावर, बाड़मेर,…

पंजाब में ‘प्रश्नपत्र लीक’ के विरोध में दिल्ली भाजपा का प्रदर्शन, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग

July 30, 2026

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की दिल्ली ईकाई ने बृहस्पतिवार को मंडी हाउस के निकट आम आदमी पार्टी (आप) के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर पंजाब में कथित प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं को लेकर राज्य के शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की। भाजपा की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा के नेतृत्व में प्रदर्शनकारी फिरोजशाह…

गृह मंत्री संसद में आने से क्यों डर रहे हैं, ‘अपराधबोध’ नजर आता है : राहुल

July 30, 2026

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर बीते 20 जुलाई को बलप्रयोग किए जाने को लेकर बृहस्पतिवार को गृह मंत्री अमित शाह पर एक बार फिर निशाना साधा और सवाल किया कि वह संसद में आने से तथा इस मामले पर सफाई देने से क्यों डरे हुए हैं। लोकसभा में…

logo