अब जब कोई और मुद्दा नहीं तो गाली का बनाओं!

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उल्लेखनीय बात है कि बिहार में वोटर अधिकार यात्रा में गाली देने की जहां यह घटना हुई, वहां राहुल और तेजस्वी गए ही नहीं थे। यात्रा जब 27 अगस्त को दरभंगा जिले से गुजर रही थी तो सिंहवाड़ा में अतरबेल गांव में एक स्वागत मंच लगाया गया था। ऐसे मंच यात्रा के रास्ते में जगह जगह लगे थे। कहीं राहुल और तेजस्वी रुकते थे। कहीं नहीं। अतरबेल के स्वागत मंच पर राहुल और तेजस्वी गए भी नहीं। गाली देने वाले को न कोई जानता है न उसकी कोई राजनीतिक पहचान है। और उसे गिरफ्तार भी कर लिया जाता है।

भारत में खास तौर पर देश के हिंदी इलाकों में जो शब्द सबसे ज्यादा बोला जाता है वह मां और बहन की गाली ही है। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने एक ही गाली का जिक्र किया। यदि वे गालियों के खिलाफ देश में कोई माहौल बनाना चाह रहे होते तो कहते कि इस तरह की हर गाली मां-बहन का अपमान है। मगर उन्होंने एक गाली की बात की और कहा कि यह मेरी मां को नहीं देश भर की महिलाओं को दी गई है। और इसके खिलाफ उन्होंने कांग्रेस और राजद के नेताओं के खिलाफ आंदोलन करने को कहा।

देश में कौन व्यक्ति ऐसा होगा जिसने इस तरह की गाली नहीं सुनी हो। कमजोर ने अपने मुंह के सामने सुनी और पीढ़ियों से सुनाता आ रहा है और बाकी लोगों को पीठ पीछे दी गई। जैसे जिसका जिक्र मोदी जी कर रहे हैं वह।

कहा जाता है कि पीठ पीछे तो राजा को भी गाली दी जाती है। मगर राजा को उसके नाम पर वोट नहीं लेना होते है इसलिए वह कभी मुद्दा नहीं बन पाई। और अब तो राजा रानी है नहीं मगर उनके बाद जो लोकतंत्र आया तो सबसे ज्यादा गालियां देश में लोकतंत्र लाने के लिए अंग्रेजों और राजा महाराजाओं से भी लड़ने वाले नेहरू-गांधी परिवार को मिलीं। उनकी गालियों के लिए तो भक्त कहते हैं क्यों मिलीं? मतलब गालियों को ही जस्टिफाई करते हैं। मगर यहां किसी एक ने भी समर्थन नहीं किया। देने वाला व्यक्ति तत्काल गिरफ्तार भी हो गया। सबने उसकी कड़े शब्दों में निंदा की।

यहां एक बात और उल्लेखनीय है। बिहार में वोटर अधिकार यात्रा जहां यह घटना हुई, वहां राहुल और तेजस्वी गए ही नहीं थे। यात्रा जब 27 अगस्त को दरभंगा जिले से गुजर रही थी तो सिंहवाड़ा में अतरबेल गांव में एक स्वागत मंच लगाया गया था। ऐसे मंच यात्रा के रास्ते में जगह जगह लगे थे। कहीं राहुल और तेजस्वी रुकते थे। कहीं नहीं। अतरबेल के स्वागत मंच पर राहुल और तेजस्वी गए भी नहीं।

यात्रा जब काफी आगे निकल गई और नेता कार्यकर्ता सब उसके साथ चले गए तब यह गाली दी गई। और देने के साथ ही आवाजें आती हैं कि गलत बात गलत बात है और गाली देने वाले से माइक छीन लिया जाता है।

गाली देने वाले को न कोई जानता है। न उसकी कोई राजनीतिक पहचान है। और उसे गिरफ्तार भी कर लिया जाता है। जैसा कि राहुल ने कहा कि क्या मैंने या तेजस्वी ने गाली दी? क्या मेरे सामने गाली दी? इसका कोई जवाब नहीं है। जबकि जो मोदी जी जो गाली को मुद्दा बना रहे हैं खुद उन्होंने क्या क्या कहा है कांग्रेस की विधवा, जर्सी गाय, 50 करोड़ की गर्ल फ्रेंड, सुर्पणखा, दीदी ओ दीदी, कांग्रेस को सवा सौ साल की बुढ़िया, कब्रिस्तान श्मशान जैसी तुलनाएं कितना बताएं! और उनकी पार्टी के नेताओं की जिनमें मंत्री और मुख्यमंत्री भी शामिल हैं की गालियों की तो बात ही क्या।

बहुत ही गलत विषय पर मोदी जी चले गए। राहुल की यात्रा का यह पेनिक रिएक्शन था। जापान और चीन की यात्रा से उन्होंने सोचा था कि देश में माहौल बन जाएगा। वैसे फोटो और खबरें गोदी मीडिया में चलाए भी गए। मगर इस बार वास्तविक सवालों को हेडलाइन मैनेजमेंट दबा नहीं पाया। सच्चाई पर कहानियां हावी नहीं हो पाईं। आज सब देख रहे हैं कि चीन की सैन्य परेड में भी पाकिस्तान के आर्मी चीफ मुनीर स्पेशल गेस्ट हैं। वहां अमेरिका में राष्ट्रपति ट्रंप उन्हें लंच पर बुलाते हैं।

यह भारत को नीचा दिखाना नहीं है। भारत एक बड़ा और मजबूत देश है उसे इन छोटी मोटी हरकतों से फर्क नहीं पड़ता है। यह खुद को विश्वगुरू बताने वाले मोदी जी को आईना दिखाना है। अभी जापान और चीन की यात्रा के बाद भी वही कहानी कि हम ही हम हैं। दुनिया के सारे देशों के राष्ट्राध्यक्ष मोदी जी मोदी जी कर रहे थे। इस आत्मश्लाधा का इलाज क्या है!

इलाज तो है भारत की छवि पेश करना। मगर यहां तो देश से ऊपर खुद को रखने का काम हो रहा है। भारत में पैदा होना और रहना शर्म की बात कह दी गई। और किसी ने नहीं खुद प्रधानमंत्री मोदी ने। और वह भी विदेश में।

तो आप समझ सकते हैं कि जब प्रधानमंत्री खुद ऐसा बोलते हों कि यह भी कोई देश है महाराज तो उनकी पार्टी के बाकी लोग क्या बोलेंगे! उन्होंने देश को 2014 में आजाद करवाया। और ऐसे लोगो को ईनाम मिलता है। कंगना रनौत जिन्होंने भारत की आजादी की तारीख बदल दी उन्हें लोकसभा की सीट दे दी। और गालीबाजों की तो बात ही क्या? एक महिला नेता रेखा गुप्ता ने तो मां की इतनी गंदी गंदी गालियां दीं कि लिखने में भी शर्म आती है। जिन पाठकों को नहीं मालूम वे गूगल कर जान सकते हैं। लेकिन इनाम में क्या मिला इसके लिए कुछ ढुंढने की जरूरत नहीं वह सबको मालूम है। दिल्ली के पुराने पुराने नेता रह गए और उन्हें मुख्यमंत्री बना दिया गया।

मणिपुर में तो महिलाओं के साथ सड़क पर नग्न जुलूस निकालकर जो हुआ उसकी अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर निंदा की गई। मगर प्रधानमंत्री वहां गए तक नहीं। सुना अब जा रहे हैं। दोहरी समस्याओं से घिरे हुए हैं। देश के साथ विदेशों में छवि खराब हो गई है। सारी कवायदें छवि को बचाने के लिए हैं।

बिहार में 4 सितम्बर गुरूवार को आधे दिन का बंद आयोजित किया है। राहुल की बिहार यात्रा ने वाकई बड़ी चोट पहुंचाई है। 17 अगस्त जब राहुल ने यात्रा शुरू की थी उससे पहले बिहार में भाजपा अपनी स्थिति मजबूत मान रही थी। मगर राहुल की यात्रा के पहले चरण ने तस्वीर बदल दी। यात्रा का दूसरा दौर भी होगा।

मोदी के लिए जवाब देना मुश्किल होता चला जा रहा है। यात्राओं ने ही उन्हें 2024 के चुनाव में लोकसभा में बहुमत नहीं मिलने दिया था। और अब यह राहुल की बिहार यात्रा उनके बिहार में पहली बार भाजपा के मुख्यमंत्री बनने के ख्वाब में बाधा बनकर खड़ी हो गई है।

राहुल ने घोषणा की है एटम बम के बाद वह अब हाइड्रोजन छोड़ने जा रहे हैं। इसके जवाब में मोदी गाली का मुद्दा ले आए। मगर इस सवाल को वे अब दबा नहीं पाएंगे कि क्या राहुल गांधी ने गाली देना तो दूर की बात क्या कभी उनकी किसी गाली का जवाब भी दिया है। राहुल का बयान है कि मैं सबसे प्रेम करता हूं। मोदी जी से भी। विरोध नीतियों और विचारों का है।

उन राहुल के खिलाफ गाली का आरोप कितना चल पाएगा कहना मुश्किल है। और इसमें सबसे बड़ा सवाल यह है कि गाली से तो राहुल का कोई संबंध नहीं है मगर वोट चोर के नारे तो उन्होंने खुद लगाए हैं। इस पर मोदी जी की कोई प्रतिक्रिया नहीं है।

क्यों? इसका जवाब मोदी जी नहीं दे सकते। मगर राहुल बताते हैं। राहुल का कहना है कि चोर जब रंगे हाथों पकड़ लिया जाता है तो उसके पास कोई जवाब नहीं होता। यही हाल मोदी जी का है। वोट चोरी जो मुख्य मुद्दा है उस पर नहीं बोल सकते। इसलिए गाली को मुद्दा बनाने की कोशिश कर कर रहे हैं।


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