महाराष्ट्र में महिलाओं की सुरक्षा की स्थिति पर सुप्रिया सुले ने जताई चिंता

Categorized as प्रादेशिक समाचार

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले ने महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को एक पत्र लिखा। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में महिलाओं की सुरक्षा की स्थिति बहुत गंभीर है। बच्चों के खिलाफ अत्याचार की घटनाओं में भी बढ़ोतरी हुई है। यह बहुत गंभीर मामला है और राज्य में सभी को सुरक्षित माहौल देना सरकार की जिम्मेदारी है। 

सांसद सुप्रिया सुले ने कहा, “मीडिया में रोजाना आने वाली खबरों और राज्यभर में हो रही घटनाओं को देखें तो यह साफ है कि राज्य में महिलाओं के खिलाफ हिंसा बढ़ी है। महिलाओं के साथ मारपीट, हत्या, यौन उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, किडनैपिंग और सबसे बुरी बात, बच्चों के शोषण की घटनाएं अक्सर हो रही हैं। मुंबई, पुणे, नागपुर, छत्रपति संभाजीनगर, नासिक जैसे तेज़ी से बढ़ते शहरों के इलाकों में अपराधों की संख्या लगातार बढ़ रही है और नागरिक डर के साये में हैं।

उन्होंने कहा ग्रामीण इलाकों में भी लगातार हो रहे अपराधों के कारण नागरिक अपनी बेटियों की सुरक्षा को लेकर डरे हुए हैं और इसका असर लड़कियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास पर पड़ रहा है। यह बहुत गंभीर है और कानून-व्यवस्था के मामले में देश में सेक्युलर माने जाने वाले राज्य की प्रतिष्ठा पूरे देश में खराब हो रही है, जो बहुत दुख की बात है। राज्य में महिलाओं को सुरक्षित माहौल देना सरकार की जिम्मेदारी है। इसके लिए तुरंत कुछ कदम उठाने की जरूरत है।

Also Read : एआई तकनीक के साथ लॉन्च हुआ फिल्म ‘कृष्णा’ का टीजर

सुप्रिया सुले ने सरकार से अनुरोध करते हुए कहा राज्य के गृह मंत्री के तौर पर महिला सुरक्षा के नजरिए से राज्य के सभी जिलों का तुरंत रिव्यू करना चाहिए। राज्य पुलिस बल में महिला पुलिस अधिकारियों की संख्या में काफी वृद्धि की जानी चाहिए और रात की गश्त बढ़ाई जानी चाहिए। सभी जिलों में ‘विकास कमेटी’ का रिव्यू करें और चेक करें कि वे काम कर रही हैं या नहीं और संबंधित लोगों को सही निर्देश दें। राज्य में महिला आयोग का पद खाली है और महिला आयोग को तुरंत उसकी सभी क्षमताओं के साथ सक्रिय किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा घरेलू हिंसा को रोकने के लिए गांव-गांव में सिस्टम को मजबूत बनाया जाना चाहिए। बाल विवाह जैसी घटनाओं को रोकने के लिए सरकारी एजेंसियों को खास अलर्ट रहने का आदेश दिया जाना चाहिए। सरकार को बाल विवाह और बाल शोषण के मामले में ‘जीरो टॉलरेंस’ पॉलिसी अपनानी चाहिए। स्कूलों और कॉलेजों में छात्राओं की सुरक्षा को लेकर ज़्यादा सतर्कता सुनिश्चित करने के लिए तुरंत गाइडलाइंस जारी की जानी चाहिए।

अंत में सुले ने भरोसा जताया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस महिलाओं की सुरक्षा को लेकर जताई गई चिंताओं को देखते हुए सही एक्शन लेंगे और महाराष्ट्र में महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल बनाने की दिशा में काम करेंगे।

Pic Credit : ANI


Previous News

More News

मतदान से पहले असहाय ममता

April 21, 2026

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पूरी तरह से असहाय दिख रही हैं। इस बार उन्होंने चुनाव प्रचार लड़ने भिड़ने के अंदाज में शुरू किया था। पिछले चुनाव यानी 2021 का विधानसभा चुनाव उन्होंने निरीहता के अंदाज में लड़ा था। अपने को दीदी की बजाय बंगाल की बेटी की तरह प्रोजेक्ट किया और लगभग पूरा…

यूपी का मंत्रिमंडल विस्तार कब होगा?

April 21, 2026

यह ऐसा प्रश्न बन गया है, जिसका कोई जवाब नहीं दे पा रहा है। 2022 में सरकार बनने के बाद से पिछले चार साल में योगी आदित्यनाथ के मंत्रिमंडल में कोई बदलाव नहीं हुआ है। एकाध वैकेंसी होने पर मंत्री बनाना या एकाध विभाग बदलना अलग बात है। लेकिन चार साल से ज्यादा समय तक…

अनिल अग्रवाल निशाने पर, बचाव में उतरे जिंदल, बेदी

April 21, 2026

वेदांता समूह के मालिक अनिल अग्रवाल निशाने पर हैं। असल में अब तक मोदी भक्ति करते रहे अनिल अग्रवाल ने पिछले दिनों सरकार की दुखती नस पर हाथ रख दिया था। उन्होंने जेपी समूह का अधिग्रहण अडानी समूह द्वारा किए जाने को चुनौती दी थी। वे अदालत पहुंचे थे, जहां उन्होंने कहा कि उनकी बोली…

महिलाओं के मतदान व्यवहार पर असर नहीं

April 21, 2026

महिला आरक्षण के लिए बनाए गए नारी शक्ति वंदन कानून में बदलाव नहीं हो सका और इससे महिलाओं को विधानसभाओं व लोकसभा में आरक्षण मिलने का रास्ता रूक गया, इससे महिलाएं बहुत नाराज होंगी ऐसा कहने और मानने वाले लोग सिर्फ भाजपा के नेता हैं। बाकी किसी को इस तरह की धारणा पर शायद ही…

सिकुड़ता हुआ श्रम बाजार

April 21, 2026

पीएलएफएस के मुताबिक श्रमिकों को कोरोना काल के पहले एक हफ्ते में जितने घंटे मिलते थे, आज उससे कम मिल रहे हैं। ऐसे में श्रमिकों की सौदेबाजी की क्षमता गिरी है और कार्य-स्थितियां बिगड़ी हैं। नतीजा बढ़ती श्रमिक अशांति है। भारत में 2025 में श्रमिकों के लिए कम कामकाजी घंटे उपलब्ध हुए। यह तथ्य ताजा…

logo