आत्मनिर्भरता से भारत के डिफेंस इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम में आ रहा बड़ा बदलाव

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सशस्त्र सेना झंडा दिवस (एएफएफडी) पर कहा कि सरकार देश को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और भारत के डिफेंस इकोसिस्टम में तेजी से बदलाव आ रहा है।

अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एक समय ऐसा भी था, जब देश हथियारों के लिए पूरी तरह आयात पर निर्भर था, लेकिन अब परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। 

पिछले 10 वर्षों में भारत के रक्षा उत्पादन में 174 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो 2014-15 में 46,000 करोड़ रुपए से बढ़कर 2024-25 में रिकॉर्ड 1.51 लाख करोड़ रुपए हो गया है। निर्यात में भी वृद्धि हुई है और यह 2013-14 में मात्र 686 करोड़ रुपए से बढ़कर 2024-25 में 23,622 करोड़ रुपए हो गया है। भारत अब 90 से अधिक देशों को रक्षा प्रणालियों का निर्यात करता है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक भारत के एक सुरक्षित, आत्मविश्वासी और विकसित राष्ट्र के रूप में उभरने के लिए रक्षा में आत्मनिर्भरता को बार-बार जरूरी बताया है। भारत के रक्षा में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने और वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में उभरने पर उनका जोर एक रणनीतिक बदलाव को दर्शाता है।

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ऑपरेशन सिंदूर जैसे सफल अभियानों पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि स्वदेशी प्लेटफॉर्म, एक बार युद्ध में प्रमाणित हो जाने पर प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करेंगे और राष्ट्रीय आत्मविश्वास का निर्माण करेंगे। इससे भारत एक भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित होगा।

रक्षा क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने की सरकार की नीति ने औद्योगिक आधार का विस्तार करने में मदद की है और भारत निर्मित सैन्य हार्डवेयर को प्राथमिकता ने रक्षा उद्योग के तेज विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि देश के तेज आर्थिक विकास ने सरकार के हाथ में अधिक संसाधन दिए हैं और इस कारण देश के रक्षा बजट का आकार वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 6.81 लाख करोड़ रुपए हो गया है, जो कि 2013-14 में 2.53 लाख करोड़ रुपए था।

Pic Credit : ANI


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