राहुल को सहयोगियों पर नहीं बोलना चाहिए

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सीपीएम के महासचिव एमए बेबी की चिट्ठी ने कांग्रेस और खास कर राहुल गांधी की राजनीति के एक ऐसे पक्ष की ओर इशारा किया है, जो पहले नहीं था। कांग्रेस के कई नेताओं ने इसे लक्ष्य किया है लेकिन किसी की हिम्मत नहीं हो रही है कि वह राहुल गांधी से यह बात कहे। कांग्रेस के कई नेता मान रहे हैं कि राहुल गांधी के अपनी पूर्व या संभावित सहयोगी पार्टियों पर सीधी टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। कांग्रेस के एक जानकार नेता ने कहा कि राहुल गांधी कोई नरेंद्र मोदी नहीं हैं कि जो चाहें बोल दें और फिर उसका उलटा काम कर दें। मोदी के साथ मीडिया की पूरी ताकत है, जो उनकी दोनों एक दूसरे की विरोधी बातों को मास्टरस्ट्रोक साबित कर सकती है। मोदी एक दिन किसी को आतंकवादियों का सरपरस्त कहते हैं और दूसरे दिन उसके साथ सरकार बना लेते हैं। वे एक दिन किसी को आकंठ भ्रष्टाचार में डूबा हुआ बताते हैं और दूसरे दिन उसको अपनी पार्टी या गठबंधन में शामिल कर लेते हैं।

कांग्रेस का कहना है कि राहुल गांधी को यह काम नहीं करना चाहिए क्योंकि इसमें सार्वजनिक नैरेटिव बिगड़ने का जोखिम भी है और पार्टियों की नाराजगी का भी खतरा है। अभी जैसे सीपीएम के महासचिव एमए बेबी ने चिट्ठी लिखी है और कहा है कि राहुल ने चुनाव प्रचार के बीच सीपीएम पर भाजपा से मिलीभगत का आरोप लगाया। इसी तरह की बात राहुल ने पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के लिए कही। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि ऐसी बातें राहुल खुद न बोलें। वे याद दिलाते हैं कि पहले सोनिया गांधी या दूसरे बड़े कांग्रेस नेता ऐसी बातें खुद नहीं कहते थे। पार्टी के दूसरे लोग इस तरह के बयान देते थे और उससे कांग्रेस आलाकमान के पास समझौता वार्ता करने की बेहतर संभावना रहती थी। इसी तरह कांग्रेस नेताओं को भी कोई निर्देश देना होता है या कोई शिकायत करनी होती है तो राहुल सीधे करते हैं। वे पार्टी महासचिव या दूसरे नेता के जरिए मैसेज नहीं कराते हैं। जैसे सिद्धारमैया को पद छोड़ने के लिए सीधे राहुल गांधी ने कहा था। पार्टी के नेता इसे भी ठीक नहीं मान रहे हैं।


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